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टीबी रोड के गड्ढों व चाटूकार ठेकेदारों के बीच पंचर हो गयी ओपी की साइकिल

शिवकुमार

गाजीपुर। टीबी रोड के गड्ढों व चाटूकार ठेकेदारों के बीच ओपी की साइकिल पंचर हो गयी। प्रदेश के दिग्गज समाजवादी राजपूत नेता व पूर्व पर्यटन मंत्री ओमप्रकाश सिंह की करारी हार की चर्चा पूरे प्रदेश में सुर्खियों में बनी है। पूर्व पर्यटन मंत्री के हार का विश्‍लेषण जमानियां विधानसभा के चट्टी-चौराहों से लेकर राजधानी के राजनीतिक गलियारों में हो रही है। 2007 में बसपा के उम्‍मीदवार पशुपति राय से पराजित होने के बाद ओमप्रकाश सिंह के राजनीतिक हैसियत को काफी धक्‍का लगा। उनके समर्थकों ने विपत्ति के समय उन्‍हे सहारा देकर 2012 के विधानसभा चुनाव में भारी बहुमत से जीताकर राजधानी भेज दिया। अखिलेश सरकार की कैबिनेट मंत्री बन गये। इनके हार के कारण में एक शुभचिंतक ने बताया कि जिन लोगों ने ओपी सिंह को विपत्ति में साथ दिया था। सत्‍ता का सुख पाते ही पूर्व पर्यटन मंत्री जी सबसे पहले अपने अनन्‍य भक्‍त समर्थकों से किनारा कस लिया। व्‍यक्तिगत कार्यो की प्राथमिकता देते हुए गरीब कार्यकर्ताओं पर रौब गांठने लगे। धनपशुओं को ड्राइंग रुम में बैठाने लगे। शुभचिंतक के अनुसार चापलूस ठेकेदारों के मकड़जाल में नेताजी फंस गये। पांच साल तक केवल गाजीपुर से लखनऊ तक स्‍टीमेट की फाइल घुमती रही। जमानियां की लगभग सभी सड़के जर्जर हो गयी। सड़कों में बड़े-बड़े गड्ढे हो गये। जिसके कारण आये दिन दुर्घटना में मौत होने लगी। जिससे पूरे क्षेत्र में विकास कार्य को लेकर पूर्व पर्यटन मंत्री के खिलाफ एक जनाक्रोश बन गया। इनके हार में प्रमुख कारणों में एक सैकड़ों जैकेट वाले प्रतिनिधि भी रहे। इस चर्चित प्रतिनिधि का ठाट मंत्री जी से भी बढ़कर था। आलमारियों में मोदी के टक्‍कर की जैकेट, ड्राइंग रुम में दर्जनों किमती जूते और मोबाईल पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना रहा। यह मंत्री जी के आस-पास हमेशा रहकर आम जनता को यह संदेश दिये कि मैं जो चाहूंगा वही मंत्री जी करेंगे। जब जनता निराश होती थी तो सारा गुस्‍सा मंत्री जी पर ही निकालती थी। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सपा पूरे प्रदेश में साफ हो गयी है। सपा के मुखिया अखिलेश यादव से पूर्व पर्यटन मंत्री ओमप्रकाश सिंह के रिस्‍ते के बारे में जगजाहिर है। ऐसे में मंत्री जी का राजनैतिक भविष्‍य किस करवट बैठेगा यह तो आने वाला समय बतायेगा।

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