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सर्प दंश से मृत बहू का शव सास के सपने पर गंगा से निकाला गया बाहर

भदोही । अंध विश्वास और स्वप्न से जुड़ी एक अजीबो गरीब ख़बर आई है । जिस पर विश्वास कराना ना मुमकिन है।लेकिन सर्प डंस के कई मामलों में ऐसा सुना गया है । उसी कहानी को दोहराती यह पटकथा है । दो दिन पूर्व सर्प डंस से मरी एक महिला का शव सपने की बिसात पर ज़िले के कोइरौना थाना क्षेत्र के कलिंजरा घाट से सुबह 07: 30 बजे निकाला गया।सर्प दंश से मृत महिला के जिंदा होने की भ्रामक ख़बर पर हजारों की भीड़ गंगा घाट पर जमा हो गई।जिसकी कहानी कुछ यूँ है । इलाहाबाद ज़िले की हंडिया कोतवाली के गहरपुर धोबहां गाँव निवासी जय प्रकाश बिंद की पत्नराी जकुमारी (30) वर्ष मंगलवार सुबह 10 बजे रसोई घर में काम कर रहीं थी । उसी वक्त पैर के अंगूठे में सांप ने डस लिया। परिजन आनन – फानन में हंडिया के निजी हास्पिटल लाए जहाँ पर चिकित्सकों नें मृत घोषित कर दिया। वहाँ से पीड़िता को लेकर परिजन भदोही सांप की दवा पिलाने लाए । यहाँ सफलता न मिलने पर पुनः गाजीपुर झाड़ फूक कराया । लेकिन कोई लाभ नहीँ पहुँचा। इसी बीच बरौत से सपेरा को बुलाकर घर में घुसे सांप को पकड़वा भी लिया। बाद में परिजनो ने मृतका के शव को बुधवार अपराह्न तीन बजे भदोही ज़िले के सीतामढी में केले के खंभे पर बांधकर गंगा नदी में प्रवाहित कर दिया । दुखी परिजन जैसे ही शाम को घर पहुंचे तो मृतका की सास प्रेमा देवी पत्नी श्यामधर बिंद ने सभी को चौंका दिया। उसने कहा बहू ने सपना दिया है वह जिंदा है । वह बोल रहीं थी कि अम्मा मैं जिंदा हूँ । सुबह कलिंजरा घाट से मुझे निकलवा लो। सास प्रेमा देवी के मुंह से यह शब्द निकलने के बाद सुबह परिजन उस  घाट पर पहुंचने तो उसका शव मछुवारो के जाल में फँसा था । ससुर श्यामधर बिंद मृतका का भाई ओम प्रकाश बिद और गाँव वाले बलवंता मांझी के सहयोग से शव बाहर निकालकर तंत्र मंत्र क्रिया द्वारा जिंदा करने का प्रयास करने लगे । घर की महिलाएं शव का हांथ पैर मालिश  करने लगी। धूप में शव को रख कर गरमी देने के प्रयास किया गया । जारी हो गये ।किसी ने 108 एम्बुलेंस को सूचित कर दिया। घाट पर एम्बुलेंस के कर्मचारी पहुंच कर जब शव को एस्ट्रेचर पर लाद डीघ स्वास्थ्य केन्द्र ले जाने लगे तो परिजनों ने शव नही जाने दिया । निजी वाहन में लादकर अपने घर झाड़ – फूंक और तंत्र- मंत्र के लिए ले गए ।हालांकि महिला जिंदा नहीँ हो पाई। जबकि डॉक्टर पहले ही मृत घोषित कर चुके थे । अब अंधविश्वास को क्या कहेंगे ।

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