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नमामि गंगे योजना… बलिया में शौचालय निर्माण का पहला शो-फ्लाप!

बलिया। नमामि गंगे योजना के तहत जनपद के पांच विकास खण्ड क्षेत्रों के चयनित 41 गांवों 29 हजार शौचालय बनना था, ताकि गंगा तटीय इलाके के गांवों में स्वच्छता की अलख जग सकें। इसके लिए प्रचार-प्रसार करने की योजना थी। हर घर में शौचालय के लिए सरकार ने काफी कुछ दिशा-निर्देश दिये थे। गांवों में समितियों का गठन भी किया जाना था, ताकि खुले में कोई शौच न जाय। इन 41 गांवों को खुले में शौच मुक्त करने के लिए 31 मार्च की समय सीमा निर्धारित थी, जो फ्लाप-शो साबित हुई है। गंगोत्री से हरिद्वार, कानपुरइलाहाबद, बनारस, गाजीपुर, बलिया, बिहार में 4 और बंगाल में 6 जगहों पर पुराने घाटों का जीर्णोद्घार, नए घाट, चेंजिंग रूम, शौचालय, बैठने की जगह, सीवेज ट्रीटमेंट प्लान्ट, आक्सीडेशन प्लान्ट बायोरेमेडेशन प्रक्रिया से पानी के शोधन का काम करने का लक्ष्य केन्द्र सरकार ने निर्धारित किया था। इसमें बलिया जनपद में 31 मार्च तक 29 हजार शौचालय सोहांव, दुबहर, बेलहरी, मुरलीछपरा व बैरिया विकास खण्ड के गंगा तटीय गांवों में बनवाने का लक्ष्य था। लेकिन चयनित 41 गांवों में से अभी भी डेढ़ दर्जन गांवों में काम नहीं हो सका है। इससे सूबे के प्रमुख सचिव काफी नाराज है। उनकी नाराजगी तीन दिन पहले वीडियो कांफ्रेंसिंग में साफ दिखी थी। सूत्रों की माने तो उन्होंने इस मामले में डीपीआरओ की क्लास भी लगाई थी। अल्टीमेटम दिया कि काम करना होगा। सूत्रों की माने तो प्रमुख सचिव की डांट के बाद कार्य में तेजी भी आया। शौचालय निर्माण के लिए मिस्त्री बढ़ाये गये, लेकिन 31 मार्च तक टारगेट पूरा नहीं हो सका। डीपीआरओ राकेश कुमार यादव का कहना है कि 28 अप्रैल तक तिथि बढ़ी है। इसमें टारगेट पूरा कर लिया जायेगा। अभी 10 गांवों में काम होना शेष है।

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