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भोजपुरिया कविता संग्रह व उपन्यास का हुआ विमोचन

वाराणसी। भोजपुरी अध्ययन में पुस्तक विमोचन समारोह में मारीशस के जाने-माने लेखक एवं कवि हीरालाल लीलाधर की भोपजुरी कविता-संग्रह ‘पाथर-रेख’ तथा ‘बाल स्यन्तक’ नामक उपन्यास का विमोचन किया गया। इस मौके पर मुख्य अतिथि डा. प्रकाश उदय ने कविता संग्रह की समीक्षा करते हुए कहा कि हीरालाल जी की इस संग्रह में अलग तरह की भोजपुरी का प्रयोग किया गया है। प्रायः कविताओं से सुसज्जित इस कविता संग्रह के रसपान हेतु इत्मीनान आवश्यक बन पड़ता है। बहुत सी कविताओं का अंत गीतों से किया गया है जो अपने आप में नया प्रयोग है। ‘दासता दिवस’ कविता में पलायन के दर्द और संघर्ष से प्राप्त ज्ञान और अनुभव को आत्मसात करने की कथा है। ‘पाथर रेख’ में पिता के बहाने अपनी पुरानी पीढ़ी के ज्ञान और अनुभव को याद करते हुए बहुत उत्साह महसूस करने की कहानी है। अपने उपन्यास ‘बाल स्यन्तक’ के बारे में बताते हुए श्री लीलाधर ने कहा कि यह उपन्यास मारीशस में प्रचलित लोक कथा पर आधारित है जिसमें स्यन्तक ग्वाले की बचपन की कहानी है। कार्यक्रम की अध्यक्षा कर रहे हिन्दी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. बलिराज पाण्डेय ने कहा कि लीलाधर जी ने कविता पर कविता लिखने की बनारसी कला को मारीशस में आत्मसात किया है। आपने बताया कि लीलाधर जी की कविताओं में भोजपुरी की महक है। भोजपुरी माटी के संघर्ष और ज्ञान का सटीक चित्रण मिलता है। इनकी कविता में ‘दुर्योधन-वृत्ति कविता के बारे में बताते हुए उन्होंने बताया कि यह कविता आधुनिक युग की पीढ़ी का सजीव चित्रण करती है। वर्तमान व्यवस्था पर चोट करती हुई कविता पर उन्होंने कहा कि रामायण की रचना करने वाले देश में आज महाभारत क्यों मची हुई है। कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों का स्वागत भोजपुरी अध्ययन केन्द्र के समन्वयक प्रो. सदानन्द शाही ने किया। इस अवसर पर विभिन्न छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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