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‘अटेन्डेंस विथ सेल्फी’ आधुनिक व अच्छी पहलः बीएसए

चंदौली। ‘अटेन्डेन्स विथ सेल्फी’ एक आधुनिक और अच्छी पहल है। इससे परिषदीय विद्यालयों में पठन-पाठन का माहौल नए सिरे से सृजित होगा। इससे जहां शिक्षक समय से विद्यालय पहुंचेंगे और बच्चों को भी विद्यालय आने के लिए प्रेरित करेंगे। इसे व्यवस्था को अपनाने में कठिनाई ना हो। इसके लिए यह कार्यक्रम निर्धारित किया गया है ताकि शिक्षक इसकी बारीकी को समझ सकें। उक्त बातें बीएसए संतोष कुमार सिंह ने पालीटेक्निक कालेज के सभागार में आयोजित कार्यशाला के दौरान कही। उन्होंने कहा कि सरकार परिषदीय विद्यालयों में निःशुल्क शिक्षा, किताबंे, यूनिफार्म, भोजन, फल, दुध आदि सुविधाएं उपलब्ध करा रही है। सरकार की मंशा है कि परिषदीय विद्यालयों में गिरते शिक्षा के स्तर में सुधारा लाया जाए। बावजूद इसके विद्यालयों में सरकार की मंशा के अनुरूप सुधार होता नहीं दिख रहा है। इसे गंभीरता से लेते हुए डीएम कुमार प्रशांत ने ‘अटेन्डेन्स विथ सेल्फी’ को चलन में लाया है। यह काफी सरल, सहज और प्रभावी है। इसे एक बार समझ लेने पर शिक्षकों को किसी भी प्रकार की समस्या नहीं होगी। कहा कि विद्यालयों में प्रार्थना के पूर्व अध्यापकों एवं छात्राओं ‘अटेन्डेन्स विथ सेल्फी‘ लेकर उसे वाट्सअप ग्रुप पर प्रतिदिन आधे घंटे के अन्दर भेजेंगे, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि विद्यालयों में अध्यापकों एवं छात्राओं की स्थिति क्या है, ‘अटेन्डेन्स विथ सेल्फी‘ का उद्देश्य है कि छात्र एवं छात्राओं में अधिक से अधिक संख्या में उत्सुकता के साथ विद्यालय पढ़ने के लिए आएं। उक्त कार्यशाला में प्रोजेक्टर के माध्यम से ‘अटेन्डेन्स विथ सेल्फी‘ के बारे में शिक्षकों व शिक्षा विभाग के अफसरों को जानकारी दी गई। चंदौली। चन्दौली पालिटेक्निक कालेज में ‘अटेन्डेन्स विथ सेल्फी’ कार्यशाला के दौरान अव्यवस्था देखने को मिली। जनपद के अलग-अलग विकास खंडों से आए शिक्षकों को सभागार में कुर्सियां नहीं मिली तो वे बाहर खड़े होकर कार्यशाला में दी जा रही जानकारी को ग्रहण करते दिखे। कार्यशाला को लेकर शिक्षकों में इस कदर गंभीरता थी कि घंटों चले कार्यक्रम के दौरान वे डंटे रहे। उन्हें इस बात की चिंता थी कि यदि वे कार्यशाला के किसी बिंदू के बारे में जानकारी लेने से वंचित रह जाएंगे तो ‘अटेन्डेन्स विथ सेल्फी’ के क्रियान्यवन में परेशान आ सकती है। इस दौरान कुछ शिक्षक अपने बच्चों को लेकर खड़े दिखे। बेसिक शिक्षा विभाग ने शिक्षकों को बुलाता तो जरूर था, लेकिन उनकी संख्या के सापेक्ष व्यवस्था करने में नाकाम रहा।

 

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