Home / न्यूज़ बुलेटिन / उमस भरी गर्मी से उबल रहे लोग, बाहर निकलना हुआ मुश्किल

उमस भरी गर्मी से उबल रहे लोग, बाहर निकलना हुआ मुश्किल

मिर्जापुर। अचानक बदलते मौसम के मिजाज से किसानों की चिंता बढ़ गई है। गेहूं की कटाई लगभग पूरी हो गई है। क्षेत्र के आधे से अधिक किसानों की फसल काटकर खेतों में मड़ाई के लिए रखी हुई है। तमाम साधनों की उपलब्धता के बाद भी पशुचारा की समस्या को लेकर किसान चिंतित हैं। मौसम परिवर्तन पुरवा हवा के झोके देख किसानों की रात की नींद भी हराम हो गई है। किसानो का कहना है कि देश का अन्नदाता हर तरह से परेशान है। कभी दैवी आपदा से तो कभी बिजली विभाग से अच्छी फसल पैदा हुई तो उसे बिक्री के लिए कारण कि सरकारी क्रय केन्द्रों का हाल भगवान भेरोसे रहता है। साहूकारों को गल्ला औने-पौने दाम बेचकर अपनी जरूरत पूरी करता है। आसमान से आग बरस रही है। ऐसा लग रहा है मानों आम आदमी का चेहरा झुलस जाएगा। कड़ाके की धूप में सड़कों पर चलना मुश्किल हो गया है। दोपहर में सड़कों पर सन्नाटा पसर जा रहा है। उमस भरी गर्मी से लोगों की रात की नींद भी हराम हो गई है। आए दिन बिजली कटौती भी हो रही है। पारा भी उतार-चढ़ाव पर है। गुरूवार को अधिकतम पारा 42 डिग्री सेंटीग्रेड पर रहा। न्यूनतम पारा 30 डिग्री सेंटीग्रेड दर्ज किया गया। अप्रैल का तीसरा सप्ताह चल रहा है। अब गर्मी भी अपना रुख दिखाना शुरू कर दिया है। हालात यह है कि सुबह आठ बजे के बाद ही चिलचिलाती धूप निकल रही हैं। इसकी वजह से लोग आठ बजे से पहले ही अपने कार्यों को निबटा रहे हैं। शाम को भी पांच बजे के बाद ही लोग सड़कों पर दिख रहे हैं। उमस भरी गर्मी की वजह से घरों में जहां कैद रहे वहीं एसी व कूलर वालों की चांदी कट रही है। रात में बिजली भी कट जा रही है। इसकी वजह से उमस भरी गर्मी में लोगों की नींद हराम हो गई है। लाइट कटने के बाद मच्छरों के प्रकोप से लोगों की नींद हराम हो गई है। दिन में जो लोग निकल भी रहे थे बिना सिर पर टोपी व तौलिया लपेटे नहीं निकल रहे थे। तमाम इंडिया मार्क हैंडपंप तेजी से पानी छोड़ना शुरू कर दिए हैं। रोडवेज व रेलवे स्टेशन पर यात्री प्यास से छटपटा रहे हैं। यहां भी प्याऊ कहीं नहीं दिख रहा है। डाक्टरो ने बताया कि गर्म हवाएं शरीर की कार्य प्रणाली पर प्रभाव डालती है। इससे लोगों की मृत्यु भी हो सकती है। इसके प्रभाव को कम करने के लिए कुछ उपायों का उपयोग किया जा सकता है। इसमें अधिक से अधिक पानी पीएं। यदि प्यास न लगी हो तब भी हल्के रंग के पसीना शोषित करने वाले वस्त्र पहनें, धूप के चश्में, छाता, टोपी व चप्पल का प्रयोग करें। ओआरएस घर में बने हुए पेय पदार्थ जैसे लस्सी, चावल का पानी, नीबू पानी, छाछ आदि का उपयोग करें। इससे कि शरीर में पानी की कमी की भरपाई हो सकें। हीट स्ट्रोक, हीट रैश, हीट क्रंप के लक्षणों जैसे कमजोरी, चक्कर आना, सिरदर्द, उबकाई, पसीना आना, मूर्छा आदि को पहचाने, कार्यस्थल पर ठंडे पीने का पानी रखें। गर्भस्थ महिला कार्मियों तथा रोगग्रस्त कर्मियों पर अतिरिक्त ध्यान देना चाहिए। उन्होंने बताया कि कुछ चीजों को गर्म हवाएं से बचने के लिए न करें जिसमें बच्चों तथा पालतू जानवरों को खड़ी गाड़ियों में न छोड़े। दोपहर 12 से तीन बजे के मध्य सूर्य की रोशनी में जाने से बचें। गहरे रंग के भारी तथा तंग कपड़े न पहने। जब बाहर का तापमान अधिक हो तब श्रमसाध्य कार्य न करें। अधिक गर्मी वाले समय में खाना बनाने से बचें। रसोई वाले स्थान को ठंडा करने के लिए दरवाजे तथा खिड़कियों खोल दें तथा शराब, चाय, काफी, कार्बेनेटेड साफ्ट ड्रिंक आदि के उपयोग करने से बचें क्योकि यह शरीर में निर्जलीकरण करता है।

About admin

Check Also

पूर्व एमएलसी विनीत सिंह बिरसामुण्डा जेल से रिहा

मिर्जापुर। बसपा नेता व बिहार, झारखण्ड, उत्तर प्रदेश के बाहुबली के नाम से चर्चित व …