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ब्योरा देने में छूट रहे अफसरों के पसीने

मिर्जापुर। चल-अचल संपत्ति का ब्योरा देने में अधिकारियों के पसीने छूट रहे हैं। अभी तक किसी भी विभाग ने शासन को चल-अचल संपत्ति का ब्योरा नहीं भेजा है। इसको लेकर अधिकारियों में खलबली मची है। उत्तर प्रदेश आचरण नियमावली के तहत हर विभाग के प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी को अपनी संपत्ति घोषित करनी पड़ती है। उन्हें यह बताना है कि उनके पास कितनी चल अचल संपत्ति है। इसके लिए बकायदा फार्म भरा जाता है, जिसमें विभिन्न बिंदुओं पर जानकारी दी जाती है। कई बार ऐसा होता है कि कुछ अधिकारियों के विरुद्ध शासन में आय से अधिक संपत्ति की जांच कराने की शिकायत होती है। वर्ष 2012 में पूरे प्रदेश के अधिकारियों ने चल-अचल संपत्ति का हिसाब दिया था। इसमें सबसे ज्यादा परेशानी स्थानांतरण होने वाले अधिकारियों को उठानी पड़ती है। ऐसा इसलिए कि उनका सर्विस बुक समेत नौकरी के अन्य जरूरी कागजात पुराने तैनाती स्थल पर ही होता है। शासन जब ऐसे अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए संपत्ति का विवरण कार्मिक विभाग से मांगा जाता है तो मामला फंस जाता है। सूबे में भाजपा की सरकार ने इसको लेकर सख्त तेवर दिखाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पहले मंत्रिमंडल के सदस्यों से फिर अधिकारियों से चल-अचल संपत्ति का विवरण मांगा है। अब तक प्रदेश के कुछ आइएएस अधिकारियों ने शासन को अपनी संपत्ति का ब्योरा दिया है। वहीं आय से अधिक संपत्ति के मामले में लखनऊ के डीआइओएस को गत दिनों निलंबित कर दिया गया। फिलहाल जिले में शिक्षा विभाग, लोक निर्माण, विद्युत, स्वास्थ्य व विकास विभाग समेत अन्य विभागों के अधिकारियों के सामने खड़ी हो गई है। सूत्रों की मानें तो कई अधिकारियों के पास बेनामी संपत्ति है। चर्चा है कि वे जानकारों से राय-मशविरा कर रहे हैं। कुछ अधिकारी चल-अचल संपत्ति का ब्योरा देने में खेल करते हैं। पर गहन जांच के अभाव में पकड़ में आ पाते हैं।

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