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डीआईओएस दफ्तर की खेल: केन्द्र बने दूर… परीक्षार्थी हुए मजबूर

बलिया। संस्कृत पाठशालाओं के परीक्षा केन्द्र निर्धारण में जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय द्वारा शासनादेश की अनदेखी की गई है। अधिकांश परीक्षा केन्द्रों को तहसील के बाहर काफी दूरी पर निर्धारित किया गया है। मजे की बात यह है कि केन्द्र निर्धारण में गोपनीयता का हवाला देते हुए परीक्षा से एक दिन पहले इसकी घोषणा की गई। कहीं से किसी आपत्ति पर भी ध्यान नहीं दिया गया। केन्द्रों के निर्धारण में जो दूरी दर्शायी गयी है, वह गलत है। उदाहरण के तौर पर दयानंद संस्कृत विद्यालय गनेशपुर को परीक्षा केन्द्र बनाया गया है। यहां पंचदेव बालिका संस्कृत मावि काजीपुर का भी परीक्षा केन्द्र है। इसकी दूरी लगभग 13 किमी है, जबकि जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय की सूची में दो किमी दर्शाकर केन्द्र निर्धारित किया गया है। इसी तरह उसी केन्द्र पर परमहंसानंद संस्कृत उमा चंदाडीह का भी केन्द्र है। इसकी दूरी 25 किमी है, जबकि कार्यालय की सूची में मात्र तीन किमी दर्शाया गया है। इसी तरह से कई ऐसे केन्द्र निर्धारित है जिनकी वास्तविक दूरी 20 से 30 किमी है, जबकि कार्यालय की सूची में मात्र छह किमी तक दूरी दर्शाया गया है। यह शासन के निर्देशों का खुला उल्लंघन है। कई विद्यालयों के प्रधानाचार्यों ने विद्यालय तथा परीक्षा केन्द्र की दूरी के बाबत परीक्षा केन्द्र बदलने का निवेदन किया, लेकिन इसकी अनदेखी कर दी गई। उदाहरण के तौर पर ओमशंकर जी संस्कृत उमा विद्यालय नगरा का केन्द्र छितेश्वर नाथ संस्कृत उमा विद्यालय चितबड़ागांव बनाया गया है, जो विद्यालय से लगभग 40 किमी दूर है। इस अनियमितता को लेकर समाजसेवी बृजकुमार द्विवेदी ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर जांच की मांग की है।

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