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न मांझी, न रहबर, न हक में हवाएं… कैसे बुझेगी सावन की ‘आग’

भोला प्रसाद

बलिया। न मांझी, न रहबर, न हक में हवाएं… है कश्ती भी जर्जर, ये कैसा सफर है…। गंगा-घाघरा की लहरें एक बार फिर जिले में तबाही मचाने को आतुर होने वाली है। संभावित खतरों का अंदाजा जिला प्रशासन को भी है, प्रशासनिक अफसरों ने डेंजर प्वाइंटों का सच भी देख लिया है। दिशा-निर्देश भी दिये जा रहे है, लेकिन सब कुछ हवा में है। जिला प्रशासन के पास बाढ़ से लड़ने के लिए कुछ भी नहीं है। इसके चलते अभी तक किसी भी खतरनाक प्वाइंट पर बचाव कार्य शुरू नहीं हो सका है, जबकि सावन आने में सिर्फ डेढ़ माह ही शेष है। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि बिना तैयारी के जिला प्रशासन सावन की बाढ़ रूपी आग पर कैसे काबू पायेगा?

बाढ़ का संभावित खतरा व जिला प्रशासन का निहत्थापन के बीच हिन्दी फिल्म के नगमें की यह पंक्ति चिंगारी कोई भड़के, तो सावन उसे बुझाये… जब सावन आग लगाये, तो उसे कौन बुझाये…अक्षरश: सटीक स्थान बना रही है। इस पंक्ति की परिकल्पना में रचनाकर की सोच चाहे जो रही हो, लेकिन यह पंक्ति बलिया की संभावित बाढ़ व उसके खतरे को खुद में समेटती नजर आ रही है। शासन हो या फिर जिला प्रशासन, सबको यह पता है कि सावन में बाढ़ आती है। गंगा-घाघरा की उफनाती लहरें जमकर तांडव मचाती है। हर साल सैकड़ों लोगों का न सिर्फ आशियाना, बल्कि खेती-गृहस्थी का सारा सामान व खेत जायदाद के साथ ही जानमाल का भी भारी नुकसान होता है। तबाही के समय प्रशासन खूब हांफता है, लेकिन होता वहीं है जो गंगा-घाघरा की लहरें चाहती है। बाढ़ के समय अधिकारियों को कौन कहें, जनप्रतिनिधि भी एक तरफ घड़ियाली आंसू का ड्रामा करते है, तो दूसरी तरफ पत्रकारों के कैमरे में कैद होने का हर संभव प्रयास करते है। शायद उनकी चाहत यही होती है कि ऐसा दिन बार-बार आये, ताकि सस्ती लोकप्रियता हासिल होती रहे। यदि ऐसा नहीं होता, तो बाढ़ का पानी उतरने के साथ ही सुरक्षात्मक कार्य करा दिया जाता। लेकिन नहीं, यदि समस्या खत्म हो जायेगी तो नेतागिरी की दुकान कैसे चलेगी? अब जब बाढ़ आने में महज डेढ़ माह शेष है, तो जिलाधिकारी के साथ ही अन्य प्रशासनिक अधिकारियों के साथ सिंचाई विभाग के अफसर निरीक्षण के रेस में पड़ताल रूपी घोड़ा दौड़ाने लगे है। डेंजर प्वाइंटों पर बचाव कार्य कब शुरू होगा? यह सवाल पूछते ही प्रशासन के लोगों की घिघी बंद हो जा रही है। प्रशासन की इस उदासीनता को देखते हुए सत्ताधारी दल के बैरिया विधायक सुरेन्द्र सिंह ने मानव श्रृंखला बनाकर सिंचाई विभाग को अल्टीमेटम भी दिया। तब जाकर प्रशासन हरकत में आया। मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने स्वयं मामले का संज्ञान लिया। बैरिया विधायक सुरेन्द्र सिंह से वार्ता कर मुख्यमंत्री ने तत्काल प्रभाव से 29 करोड़ रुपये भी स्वीकृत किये। बैरिया तहसील क्षेत्र की गोपालपुर ग्राम पंचायत की सुरक्षा के लिए शुक्रवार को कटान रोधी कार्य को जमीन अधिग्रहण के मामले में दुबेछपरा, गोपालपुर व उदईछपरा के किसानों के साथ सिंचाई विभाग ने बैठक की, लेकिन मुआवजे की धनराशि पर सहमति नहीं बन पायी। इसके चलते अधिकारियों के साथ सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता दिलीप कुमार चतुर्वेदी को बैरंग लौट जाना पड़ा।

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