Home / बनारस / बाहुबली बृजेश सिंह के करीबी राम बिहारी चौबे हत्या कांड: पुलिस ने विधायक सुशील सिंह को चार्जशीट में लपेटा

बाहुबली बृजेश सिंह के करीबी राम बिहारी चौबे हत्या कांड: पुलिस ने विधायक सुशील सिंह को चार्जशीट में लपेटा

वाराणसी। एमएलसी बृजेश सिंह के करीबी और बसपा नेता राम बिहारी चौबे की लगभग डेढ़ साल पहले हुई हत्या के मामले में सैयदराजा के विधायक सुशील सिंह को राहत नहीं मिल सकी है। पिछले दिनों कोर्ट में दाखिल चार्जशीट में विधायक को क्लीनचिट देने के बदले लिखा है कि विवेचना चल रही है। इस मामले में सुशील का नाम पहली बार उस समय चर्चा में आया था जब मुख्य आरोपित बनाये गये अजय मरदह की गिरफ्तारी का विरोध करने के लिए वह पहुंचे थे। मामले ने उस समय दूसरा रूप ले लिया जब स्व. चौबे के पुत्र अमरनाथ ने विधायक पर संगीन आरोप लगाये। इसके बाद तत्कालीन एसओ से लेकर एसपीआरए तक का तबादला हो गया। माना जा रहा है कि शासन स्तर पर विधायक की पैरवी के चलते ऐसा हुआ। तत्कालीन एसएसपी नितिन तिवारी इकलौते अधिकारी थे जो बचे थे। जिस दिन उनके तबादले का आदेश हुआ उसी दिन पुलिस ने तमाम दबाव को दरकिनार करते हुए चार्ज शीट कोर्ट में दाखिल कर दी। इसमें साजिश रचने की धारा 120बी बढ़ाई गई है। इस हाईप्रोफाइल मामले का एक पहलू यह भी है कि हत्या से अधिक खुलासे के बाद सरगर्मी बढ़ी थी। विधायक ने इस मामले में विरोधी बाहुबली मुख्तार अंसारी के साथ ही स्थानीय पुलिस से लेकर एसटीएफ के इंस्पेक्टर तक की भूमिका पर सवालिया निशान लगाये थे। उनके साथ पिण्डरा विधायक अवधेश सिंह तथा जफराबाद के विधायक हरेन्द्र प्रसाद सिंह ने संयुक्त रूप से प्रमुख सचिव गृह को पत्र भेजा था। इसमें राजनीतिक लाभ की खातिर छवि धूमिल करने के लिए स्व. चौबे के परिवार को मोहरा बना कर साजिश के तहत नाम उछालने का आरोप लगाया था। जांच पुलिस के बदले प्रदेश की किसी एजेंसी या जरूरत पड़े तो सीबीआई से कराने का अनुरोध किया गया था। ग्रामीण अभियंंत्रण विभाग के मंत्री राजेन्द्र प्रसाद सिंह ‘मोती सिंह’ ने तो न्यायहित में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक वाराणसी के अतिरिक्त किसी सक्षम जांच एजेंसी से कराने की सिफारिश करते हुए पत्र लिखा था। चौबेपुर पुलिस ने अजय मरदह समेत तीन लोगों की गिरफ्तारी करने के बाद जिला जेल में शिनाख्त परेड करायी थी। इसके बाद एसओ समेत कई का तबादला होने से आशंका जतायी जा रही थी कि सत्ताधारी दल के विधायक की पैरवी के चलते मामला ठंडे बस्ते में चला गया। चार्ज शीट को तीन माह के भीतर दाखिल करना होता है अन्यथा आरोपित को जमानत मिल जाती है। अंतिम दिन जिस तरह आनन-फानन में चार्जशीट को कोर्ट में पहुंचाया उससे साफ प्रतीत है कि किसी आला अधिकारी के निर्देश पर ऐसा हुआ था।

About admin

Check Also

ट्रेन से कटकर एक युवक की मौत

मिर्जापुर। जिले के अदलहाट थाना क्षेत्र के नरायनपुर चौकी के दर्रा गांव के सामने ट्रेन …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *