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यूपी में साम्प्रदायिक ताकतों को मुंहतोड़ जवाब देगी बसपा- अफजाल अंसारी

गाजीपुर। बसपा के वरिष्‍ठ नेता व पूर्व सांसद अफजाल अंसारी ने दावा किया है कि यूपी में साम्‍प्रदायिक ताकतों के खिलाफ बसपा ही लड़ेगी। क्‍योंकि सपा बड़ी पार्टी है लेकिन उसका नेतृत्‍व छोटा है। जिसकी वजह से पार्टी में उथल-पुथल मचा हुआ है। अधिकांश वरिष्‍ठ नेता सपा के राष्‍ट्रीय नेतृत्‍व पर विश्‍वास नही करते हैं। वह समाजवादी पार्टी के संस्‍थापक मुलायम सिंह यादव में अपना आस्‍था और विश्‍वास रखते हैं। सपा का राष्‍ट्रीय नेतृत्‍व जिस तरह से मुलायम सिंह और शिवपाल यादव को महत्‍वहीन कर समाप्‍त करने का प्रयास कर रहा है। उससे दुखी होकर सपा के बड़े नेता दूसरे दलों की तरफ पलायन कर रहे हैं। सपा सुप्रीमो का सीधा टारगेट मुलायम सिंह और शिवपाल यादव हैं। वह इन दोनों नेताओं को हर हाल में राजनीतिक क्षितिज पर मिटाना चाहते हैं। समाजवादी पार्टी घर के दंगल में ही व्‍यस्‍थ है। उसे प्रदेश की जनता के दुख-दर्द से कुछ लेना-देना नही है। सपा, भाजपा के सामने आत्‍मसमर्पण कर दिया है। श्री अंसारी ने बताया कि बसपा सुश्री बहन मायावती जी के नेतृत्‍व में एक बार रि‍मार्डनाईज हो रही है। पुराने कामचोर अवसरवादी नेताओं को बाहर का रास्‍ता दिखाया जा रहा है। युवाओं को आगे बढ़ने का अवसर प्रदान किये जा रहे हैं। बैकवर्ड, अल्‍पसंख्‍यक और ब्राह्मण समाज सहित सर्वसमाज को बसपा में समाहित कर एक बार फिर बसपा को बुलंदी पर लाने का प्रयास हो रहा है। बसपा के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष बहन मायावती 18 सितंबर से मंडलवार कार्यकर्ता सम्‍मेलन कर भाजपा सरकार की पोल खोलेंगी। देश-प्रदेश में हिंदू-मुसलमान को बांटकर राजनीति करने वालों का पोल खोला जायेगा। बिहार के मुद्दे पर अफजाल अंसारी ने बताया कि बिहार में एक अकेला लालू यादव ही साम्‍प्रदायिक ताकतों के खिलाफ लडा़ई लड़ रहे हैं। नी‍तीश कुमार ने राजद नेता लालू यादव को जो धोखा दिया है उससे पूरे बिहार की जनता मर्माहित है। उन्‍होने बताया कि नीतीश कुमार को नैतिकता और पारदर्शिता में इतना विश्‍वास था तो वह इस्‍तीफा देकर भाजपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ लेते तो उन्‍हे हिसाब-किताब मालूम हो जाता। उ’न्‍होने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने गुजरात में हार्दिक पटेल की आग को बुझाने के लिए नीतीश कुमार के दामन को थामा है क्‍योंकि गुजरात विधानसभा का चुनाव लोकसभा चुनाव से पहले है। गुजरात में भाजपा के खिलाफ माहौल बन रहा है। ऐसे में अगर परिणाम गुजरात का गड़बड़ हुआ तो इसका प्रभाव लोकसभा चुनाव पर भी पड़ सकता है।

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