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बाबरी मस्जिद: शिया के हलफनामा देने से दोनो वर्गो में बढी कटूता

लखनऊ। अयोध्या विवाद में राम मंदिर के पक्ष में वसीम रिजवी के हलफनामे ने शिया और सुन्नी वक्फ बोर्ड की कड़वाहट और बढ़ा दी है। सुन्नी वक्फ बोर्ड ने कहा है कि इसका जवाब कोर्ट में दिया जाएगा। हलफनामे की भाषा और आरोपों पर सवाल उठाते हुए सुन्नी वक्फ बोर्ड के चेयरमैन जुफर अहमद फारूकी ने कहा है कि वसीम रिजवी को यह बताना चाहिए कि सुन्नी वक्फ बोर्ड में कौन-कौन कïट्टरपंथी और उन्मादी है। गौरतलब है कि हलफनामे में रिजवी ने सुन्नी वक्फ बोर्ड पर इस तरह के आरोप भी लगाए हैं। फारूकी ने कहा है कि सुन्नी वक्फ बोर्ड इसकी निंदा करता है। उन्होंने कहा है कि रिजवी को इस तरह के आरोप लगाने की आदत है और कुछ समय पहले शिया समुदाय के एक धर्मगुरु पर भी उन्होंने ऐसे ही आरोप लगाए हैं। फारूकी ने यह भी कहा है कि जहां तक अयोध्या विवाद का संबंध है, वह किसी भी बातचीत से पीछे नहीं हटेंगे और न बोर्ड पहले कभी हटा है लेकिन, कोई भी सम्मानजनक समझौता मूल पक्षों के बीच केंद्र सरकार की सक्रिय भागीदारी के बीच ही होना चाहिए। उल्लेखनीय है कि उप्र शिया वक्फ बोर्ड ने हलफनामा दायर करके कहा है कि यह मस्जिद मीरबाकी ने बनवाई थी, जो शिया था। शिया वक्फ बोर्ड का कहना है कि मस्जिद को रामजन्मभूमि से कुछ दूर मुस्लिम बहुल इलाके में बनाना चाहिए। बोर्ड की दलील है कि 1946 तक मस्जिद उनके पास थी लेकिन, अंग्रेजों ने गलत कानूनी प्रक्रिया से इसे सुन्नी वक्फ बोर्ड को दे दिया।

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