Home / ब्रेकिंग न्यूज़ / कजली महोत्सव: घड़ी-घड़ी गरजे बदरिया, चमके बिजुरिया रे हरि

कजली महोत्सव: घड़ी-घड़ी गरजे बदरिया, चमके बिजुरिया रे हरि

मिर्जापुर। जनपद की माटी से पैदा हुई कजली महोत्सव 2017 के मंच पर आये कलाकारों ने श्रोताओं को भोर की लालिमा तक बांधे रखा। यह अवसर संस्कार भारती और लायंस क्लब के संयुक्त तत्वावधान में लालडिग्गी स्थित लायंस स्कूल के सभागार में पर्व पर सजे मंच से मिला। अपनी धरोहर कजली की लुप्त होती विधाओं को सुनने के लिए जुटे श्रोताओं ने कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। खचाखच भरे हाल के बाहर लगे प्रोजेक्टर से पर्दे पर चल रहे कार्यक्रम का भी श्रोता आनंद उठाते रहे। कार्यक्रम का शुभारम्भ सरस्वती वंदना और संस्कार भारती ध्येय गीत से हुआ। इसकी प्रस्तुति किरन की शिष्याओं ने प्रस्तुत किया द्य इसके बाद अमरनाथ शुक्ल ने घड़ी – घड़ी गरजे बदरिया चमके बिजुरिया रे हरि की प्रस्तुति कर अपनी माटी की खुश्बू का एहसास कराया। उषा गुप्ता ने मिर्जापुर कइल गुलजार हो, कचैड़ी गली सून कइल बलमू की प्रस्तुति की। अंग्रेजी माध्यम से संचालित लायंस स्कूल की बालिकाओं ने घेर – घेर आयी सावन की बदरिया ना का गायन कर अपनी धरोहर संजोये रखने की ललक का आभास कराया। डैफोडिल्स की छात्राओं ने कजली प्रस्तुत किया। रानी सिंह ने सैया भइले परदेशिया अरे सावलिया की प्रस्तुति कर वाहवाही लूटी। अर्पिता तिवारी ने कइसे खेलन जइबू सावन में कजरिया, बदरिया घेरे आई ननदी।  माया कसेरा ने विरन भईया अइले अनवईया, सवनवा में नाहीं जइबे ननदी की मनोहारी तान छेड़ वाहवाही लूटी। इसके बाद अमित दुबे ने हो मईया कब देबू दर्शनवा, अब त चढ़ल सवनवा ना की प्रस्तुति की। लल्लन मालवीय के पौत्र रामकृष्ण मालवीय ने विरासत में मिली गायन थाती से निकालकर गोइया रही रही चमके बदरिया रे झालरियाँ को मनोहारी ढंग से प्रस्तुत किया। मोहनलाल कांस्यकार ने पिया आये ना सवनवा में निकस कर के को प्रस्तुत कर विरह में जल रही नायिका का चित्रण किया। बाबूलाल शर्मा एवं सरोज मौर्या एंड पार्टी ने लुप्त हो रही चैलर की विधा का मंचन कर शकुनि बेइमनवा की तान छेड़कर लोगों को अपनी विरासत के एक पहलु से अवगत कराया। कार्यक्रम में जया पाठक ने जा जा रे बदरिया कारि कारि, संदेशा मोरा श्याम से कहो की आवाज लगाकर श्रोताओं को भक्ति सागर में डुबकी लगवाया। कजली अखाड़े के गायक पट्टर पाण्डेय ने झूमकर कजली प्रस्तुत किया। इसके अलावा श्रीमती कुसुम पाण्डेय, मनोज शर्मा, शिवलाल गुप्ता, मो० मुस्तकीम, अतुल देव दुबे, चित्रांशी श्रीवास्तव, ब्रह्मदेव पाण्डेय, कल्पना गुप्ता, सुरेश मौर्या, गणेश प्रसाद गुप्ता, ओमप्रकाश तिवारी, अगनु साहू, सब्दल, सूरज सोनकर एवं देवी प्रसाद मौर्य ने श्रोताओं को देर रात तक बांधे रखा। गायकों के साथ तबला पर झब्बूलाल, ढोलक पर पप्पू अंग्रेज और रोहित कुमार, हारमोनियम पर मो० मुस्तकीम, ओमप्रकाश दुबे आर्गन पर और शहनाई पर तौलन ने संगत किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ० गणेश प्रसाद अवस्थी ने किया। कजली उल्लास का पर्व है। जहा उल्लास है वही कृष्ण का अवतार होगा। जहाँ उल्लास नहीं है वहाँ श्रीकृष्ण का अवतार नहीं होगा। इससे धरती भी पाप मुक्त नहीं होगी। उल्लास से उत्पन्न सौहार्द और सदभाव से ही समाज एवं जीवन के अंधकार को समाप्त किया जा सकता है। मिर्जापुर की धरोहर कजली को संरक्षित रखने के लिए सदन में आवाज उठाई गयी है। इसके लिए सबके मन में संकल्प और दृंढ इच्छा शक्ति के साथ सतत प्रयास की जरुरत है। उक्त विचार संस्कार भारती और लायंस क्लब के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कजली महोत्सव 2017 के उद्घाटन सत्र में मंचासीन अतिथियों ने व्यक्त किया। मझवां विधान सभा क्षेत्र की विधायक सुचिस्मिता मौर्या ने कहा कि जनपद को विश्व पटल पर पीतल के बर्तन, दरी और कालीन के साथ ही अपनी सांस्कृतिक धरोहर कजली से भी पहचान मिली है। गायन की इस विधा की सबसे बड़ी विशेषता इसकी मिठास है जो दिल को स्पर्श कर बरसों याद रहती है। कजली फले फूले इसके लिए विधान सभा में आवाज उठाई गयी है। अपनी धरोहर की मिठास लोगों के दिलों में बनी रहे। जिलाधिकारी विमल कुमार दुबे ने कहा कि विंध्य क्षेत्र की संस्कृति को संरक्षित रखने के लिए एक मंच की आवश्यकता है। इसके माध्यम से क्षेत्र की धरोहर रूपी कजली, साहित्य एवं लेखन को संरक्षित रखकर भावी पीढ़ी को सौंपा जा सके। इससे मंच को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पटल पर मौका मिलेगा। जिलाधिकारी श्री दुबे ने कहा कि पर्व पर उल्लास बना रहे। उल्लास नहीं होगा तो कृष्ण अवतार नही होगा। कृष्ण का अवतार नहीं होगा तो धरती पाप मुक्त नहीं हो पायेगी। पुलिस अधीक्षक आशीष तिवारी ने कहा कि कजली के बारे में हमें बताया गया कि पहले कजली चैराहों पर गायी जाती थी। पुरानी परम्परायें पुराने लोगों ने देखी है। नवीन और पुरातन का मिश्रण किया जाय तो धरोहरों को संरक्षित रखा जा सकता हैं। अपने जापान प्रवास की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि जापान में आज भी प्राचीन परम्पराओं को इस प्रकार संरक्षित करके बचायें हुए है। लोगों में प्रेम भाईचारा बढ़े यही पर्व का मकसद होता है। कार्यक्रम संयोजक डॉ० गणेश प्रसाद अवस्थी ने कजली के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पुरे देश में गायी जाने वाली कजली का उद्भव स्थल मिर्जापुर है। कजली के माध्यम से हम राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पहचान बना सकते है। कार्यक्रम का उद्घाटन दीप प्रज्ज्वलन और आदिशक्ति माँ विंध्यवासिनी व गणपति की पूजा करके किया। स्वस्तिवाचन पं० नितिन अवस्थी और संदीप दुबे ने किया। स्वागत लायंस क्लब की अध्यक्ष संगीता अग्रवाल और धन्यवाद ज्ञापन संस्कार भारती के जिलाध्यक्ष राजपति ओझा ने किया। अतिथियों को स्मृति चिह्न कजली महोत्सव के संरक्षक विश्वनाथ अग्रवाल ने भेंट किया। संचालन विष्णु नारायण मालवीय ने किया। इस मौके पर उप जिला मजिस्ट्रेट सदर अविनाश त्रिपाठी, केदारनाथ अग्रवाल, संदर्भ पाण्डेय, महेश्वरपति त्रिपाठी, ऋषभ अग्रवाल, जया पाण्डेय, पवन मालवीय, सोमेश्वर प्रसाद मिश्र, मदन अग्रवाल, साधना तिवारी, संगमलाल अग्रवाल, डॉ० राजीव अग्रवाल, मनोज श्रीवास्तव दमकल, लालबहादुर सिंह, डॉ० सरिता त्रिपाठी, डॉ० माया त्रिपाठी, डॉ० अर्चना पाण्डेय, शिवलाल अवस्थी, कान्ति पाण्डेय, पूनम पाण्डेय, रागिनी चंद्रा, राजकुमार पाहवा, प्रमोद चंद्र अग्रवाल, शंकर सोनी, कृष्ण मोहन गोस्वामी, गोपाल जी कांस्यकार, गोविन्द विश्वकर्मा, विनोद सिंह, शीतला प्रसाद, डॉ० संतोष सिंह, जगदीश सिंह पटेल, डॉ० राजेश मिश्र, नीरज सिंह, शशांक चतुर्वेदी, राजेश तिवारी. गंगाराम यादव, ऋषि शुक्ल, ज्ञानशंकर पाण्डेय, लल्लू तिवारी, राजेंद्र तिवारी, राजेंद्र प्रसाद जायसवाल टुनटुन आदि उपस्थित थे।

About admin

Check Also

लोकसभा उपचुनाव: सपा-बसपा का होमवर्क शुरू

लखनऊ। सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ औऱ डिप्टी सीएम के लोकसभा सीटों से इस्तीफे के …