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भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के पद पर ब्राह्मण कार्ड खेलने से अति पिछड़ों व अति दलितों में बेचैनी

शिवकुमार

लखनऊ। भाजपा के प्रदेश अध्‍यक्ष पर ब्राह्मण कार्ड खेलने से अति बैकवर्ड व अति दलित के नताओं और कार्यकर्ताओं में काफी बेचैनी है। पार्टी के अनुशासन के कोड़े से भयभीत अति दलित व अति बैकवर्ड कार्यकर्ता व नेता मुखर होकर हाईकमान के फैसले के खिलाफ बोल नही सकता है लेकिन उसके अंदर ही अंदर बेचैनी घेरी है। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार अति बैकवर्ड व अति‍ दलित समाज के लोग लोकसभा 2014 में और विधानसभा 2017 में भाजपा के झंडे तले आकर केंद्र व राज्‍य में भाजपा की भारी बहुमत की सरकार बना दी। चुनाव के दौरान यह दोनों वर्ग कमल के फूल के लिए काफी उत्‍साहित थे, क्‍योंकि लंबे समय से सपा और बसपा ने इन दोनों वर्गो को उपेक्षित किया हुआ था। समाजवादी पार्टी में यादवों की चली तो बसपा में हरिजन का सिक्‍का चला। लगभग दो दसक तक सपा-बसपा के चक्‍की में अति पिछड़ा व अति‍ दलितों के पिसने के बाद भाजपा के झंडे तले इन दोनों वर्गो को काफी राहत महसूस हुआ। इन दोनों वर्गो के नेता सपा-बसपा छोड़कर भाजपा का दामन पकड़ लिया। देश और प्रदेश में एक नई राजनीति समीकरण का उदय हुआ। फारवर्ड वोटों के साथ अति बैकवर्ड व अति दलितों ने लाईन लगाकर कमल के फूल पर मुहर लगा दी। मोदी को प्रधानमंत्री और योगी को मुख्‍यमंत्री बना दिया। प्रदेश में सरकार बनाने के कवायद में सबसे पहले धक्‍का अति बैकवर्ड को लगा कि केशव प्रसाद मौर्या की जगह भाजपा ने आदित्‍यनाथ योगी को प्रदेश का मुख्‍यमंत्री बना दिया। इसके बाद मंत्रिमंडल के बंटवारे में भी अति दलित व अति बैकवर्डो को महत्‍वहीन विभाग दिये गये। अभी घाव पूरा भरा ही नही था कि हाईकमान ने ब्राह्मण कार्ड खेलते हुए महेंद्रनाथ पांडेय को भाजपा का प्रदेश अध्‍यक्ष बना दिया। भाजपा के एक वरिष्‍ठ बैकवर्ड नेता अपना नाम न छापने के शर्त पर बताया कि जिस सीढ़ी से भाजपा सत्‍ता में आई है उसी सीढ़ी को वह खत्‍म करने पर तूली है। आज पूरे प्रदेश के थानों, सरकारी महकमों व वरिष्‍ठ प्रशासनिक पदों पर एक विशेष सवर्ण जाति के लोग बैठाये जा रहे हैं। वहीं अति बैकवर्ड व अति दलित वर्ग के अधिकारी, कर्मचरी, थानेदारों व पुलिस के जवानों का शोषण किया जा रहा है। भाजपा का फैसला कितना सही और कितना गलत होगा यह तो आने वाला समय ही बतायेगा। फिलहाल भाजपा के साम्राज्‍य में सवर्ण और अति पिछड़े व अति दलितों के बीच दरार पड़ती नजर आ रही है।

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