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चरित्र निर्माण में ‘शिक्षक भूमिका’ पर मंथन जरूरी

बलिया। राष्‍ट्रीय स्वयं सेवक संघ की पे्ररणा से देश के हर कोने में सरस्वती शिशु मंदिरों के माध्यम से राष्‍ट्र निर्माण का वीणा उठाने वाली संस्था विद्या भारती अब नयी पीढी के चरित्र निर्माण के लिए संघर्ष करेगी। परिवर्तन के इसी शंखनाद के लिए प्रान्त में सबसे पहले ऐतिहासिक धरती बलिया को चुना गया है। शिक्षक दिवस पर मुरली मनोहर टाउन महाविद्यालय के मनोरंजन हाल में चरित्र निर्माण में शिक्षक की भूमिका विषय पर गोष्ठी इसी का आगाज करेगी। शहर के एक होटल में आयोजित प्रेसवार्ता में कार्यक्रम संयोजक रामकृष्ण उपाध्याय ने कहा कि गोष्ठी के मुख्य वक्ता विद्या भारती के राष्‍ट्रीय मंत्री अवनीश भटनागर व विद्वत परिषद के संयोजक प्रभुनाथ सिंह होंगे। अध्यक्षता जननायक विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. योगेन्द्र सिंह करेंगें।

विद्या भारती के प्रदेश मंत्री अक्षय ठाकुर ने बताया कि विद्या भारती भारत में शिक्षा के क्षेत्र में सबसे बड़ी अशासकीय संस्था है। इसके कुल 23230 शिक्षण संस्थानों में147634 शिक्षकों के माध्यम से 34 लाख छात्र-छात्राएं शिक्षा व संस्कार ग्रहण कर रहे हैं। इनमें 49 शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान एंव महाविद्यालय, 2353 माध्यमिक, 923 उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, 633 पूर्व माध्यमिक, 5312 प्राथमिक, 4164 उच्च प्राथमिक, 6127 एकल शिक्षक विद्यालय तथा 3679 संस्कार केन्द्र हैं। विद्या भारती के माध्यम से विद्यालयों की संख्या लगातार बढ रही है। प्रेसवार्ता में नागाजी शिशु मंदिर के प्रबन्धक अनिल सिंह, प्रचार्य श्रवण सिंह, डाक्टर प्रदीप श्रीवास्तव, राजेन्द्र पाण्डेय, दिनेश राय व हरेराम राय उपस्थित थे।

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