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गाजीपुर: भारतीय संस्कृति के प्रतिनिधि हैं भगवान श्रीराम – कुलपति

जखनियां। वसुधैव कुटुंबकम का भाव सिखाती है भारतीय दर्शन। एक तरफ जहां दुनिया के सभी धर्म जियो और जियो देने के सूत्र पर कार्य करते हैं, वहीं एक हिंदू धर्म ही ऐसा है जो सर्वे भवंतु सुखिनः पर विश्वास रखता है। हम महिलाओं को बराबरी का स्थान ही नहीं देते बल्कि उन्हें अपने समाज में सर्वोच्च स्थान प्रदान करते हैं। उक्त उद्गार सिद्धपीठ हथियाराम मठ पर पिछले 2 माह से लगातार चल रहे चातुर्मास महायज्ञ की पूर्णाहुति समापन समारोह पर काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफ़ेसर गिरीश चंद त्रिपाठी ने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा। लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण ताकतवर लोग करते हैं और ताकतवर का निर्माण अच्छे शिक्षण संस्थान व गुरुकुल ही कर सकते हैं। हमारे ताकतवर कहने का तात्पर्य चरित्रवान, धैर्यवान, शीलवान व गुणवान व्यक्तित्व से है ताकतवर मात्र शारीरिक ताकत से नहीं बताया जा सकता और ऐसे में सिद्ध संतो धार्मिक नीतियों परंपराओं व विद्यालय ही ताकतवर का निर्माण कर सकते हैं। काशी हिंदू विश्वविद्यालय पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि काशी हिंदू विश्वविद्यालय राष्ट्र का संकल्प है। सौ वर्ष पूर्व अंग्रेजों के शासन में जिस महामना मदन मोहन मालवीय ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना की नींव रखी आज आजाद भारत में भी कोई हिंदू विश्वविद्यालय की नींव रखने की साहस नहीं जुटा सकता है। मैं महामना मालवीय जी को गरीब परिवार का नहीं मान सकता क्योंकि व्यक्ति धन से नहीं मन व आत्मा से व्यक्ति गरीब होता है जो मालवीय जी कतई नहीं थे मालवीय जी संकल्प से पूर्णता मजबूत थे।जिस 43 वर्ष की उम्र में हम अपने कैरियर बनाने की तरफ ध्यान देते हैं, उस उम्र में मालवीय जी ने एक विश्वविद्यालय की स्थापना का संकल्प ले लिया। हमारे देश के शिक्षा व्यवस्था का दुर्भाग्य है कि आजादी के सात दशक बाद भी आज हमारे युवा अपने को पिछड़ा घोषित कराने में लगे हुए हैं, जबकि समूचा विश्व आगे बढ़ने की इच्छा में है वही हम आज भी लड़ाई लड़ रहे हैं कि हम को ओबीसी में रखा जाए। मैं इलाहाबाद विश्वविद्यालय का छात्र हूं और इस नाते इलाहाबाद विश्वविद्यालय को देश का सबसे बड़ा विश्वविद्यालय मानता हूं लेकिन काशी हिंदू विश्वविद्यालय को उससे श्रेणी से अलग रखता हूं क्योंकि काशी हिंदू विश्वविद्यालय का निर्माण राष्ट्र के निर्माण के लिए हुआ था। यह राष्ट्र का संकल्प है। भगवान राम के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति के प्रतिनिधि हैं भगवान श्रीराम जिन्होंने सीता माता के सम्मान की रक्षा के लिए पैदल हिंद महासागर पार कर दिया। वही पांडव ने द्रोपदी के सम्मान के लिए महाभारत युद्ध किया गया ऐसे में हम कैसे कहें कि हमारे देश में महिलाओं का सम्मान नहीं, युगों से महिलाओं के सम्मान के लिए हम सदैव आगे बढ़ते रहे हैं।  सिद्धपीठ से जुड़ी महामंडलेश्वर माता योगेश्वरी यति जी ने कहा कि मेरे जनम जनम के पुण्य कर्मों का फल है कि मैं यति परिवार से हूं और पूर्वजन्म के संस्कारों के परिणाम स्वरुप सिद्धपीठ से जुड़ी हुई है, जो मां भगवती के विशेष कृपा है। उन्होंने भ्रूण हत्या पर प्रहार करते हुए कहा कि गर्भस्थ शिशु शिव या शिवा का स्वरुप है, भ्रूण हत्या से व्यक्ति का विनाश निश्चित है। गर्भ में ब्रम्ह पल रहा है उसका स्वागत होना चाहिए। आधुनिकता व फैशन पर प्रहार किया कहां की माताएं राष्ट्रगौरव हैं आधुनिकता का मतलब नग्नता नहीं और महिला सशक्तिकरण का मतलब विद्रोह नहीं। महामंडलेश्वर स्वामी सोमेश्वर यति जी महाराज ने कहा कि लगातार 25 वर्षों से सिद्धपीठ द्वारा किया जा रहा चातुर्मास यज्ञ इस सिद्धपीठ की महत्ता को बढ़ाते हैं। जन्म जन्म के पुण्य कर्मों के उदय से मानव शरीर प्राप्त होता है। मानव शरीर शिव तत्व की ध्यान करने से मोक्ष को प्राप्त होता है, गाय गीता और गंगा की सेवा ही मोक्ष का प्रमुख साधन है। गुरुओं के बताए सत्कर्मों पर चलने से ही हमारा कल्याण व मन की शांति संभव है। महामंडलेश्वर मोहनानन्द यति जी महाराज ने कहा कि ज्ञान विज्ञान भारत की ही देन है। हथियाराम मठ स्वयं अपने आप में एक विश्वविद्यालय है। नारी हमारे लिए गौरी का प्रतीक है जो सदैव से पूजनीय बनी हुई है। अखिल भारतीय गौ सेवा प्रमुख व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह सेवा प्रमुख अजीत महापात्रा ने अपने संबोधन में कहा कि हम सभी में देवताओं का वास है। माता सीता के हरण के समय जटायु ने अपनी संस्कृति प्रकृति व धरती की रक्षा के लिए रावण जैसा बलशाली से भी युद्ध कर लिया। जटायु ने संकल्प लिया था कि जब तक प्रभु श्री राम को माता सीता का संदेश नहीं दे देता तब तक प्राण नहीं त्याग देंगे। एक अच्छे संस्कार की वजह से कीट पतंग खाने वाले जटायु का भी आज हम सम्मान करते हैं और उनकी पूजा करते हैं। अतः आप सभी को संकल्प लेने की आवश्यकता है कि हम अपने घर में और प्राकृतिक दूध का प्रयोग नहीं करेंगे वह भगवान की पूजा शुद्ध देसी गाय के दूध से ही करेंगे बीएचयू की स्थापना को उन्होंने हिंदू वर्ण गुणधर्म वर्धन के लिए बताते हुए कहा कि धरती का रूप है गाय। महामंडलेश्वर परेशनंद यति जी महाराज ने कहा की संपूर्ण जगत ईश्वर की रचना है। मठ का निरंतर विकास गुरुजनों के आशीर्वाद कृपा से संभव हो सकता है सभी संतो को प्रणाम कर उन्होंने श्रद्धालुओं का आशीर्वाद प्रदान किया। सिद्धपीठ के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर भवानीनन्दन जी महाराज ने आगन्तुकों का आभार प्रकट करते हुए ब्रह्मलीन गुरु जी महामंडलेश्वर स्वामी बालकृष्ण यति जी को श्रद्धांजलि अर्पित किया। देर शाम तक लोगों ने भंडारा प्रसाद ग्रहण किया। इस समारोह को पातालपुरी मठ पीठाधीश्वर महंत बालक दास जी महाराज, काशी हिंदू विश्वविद्यालय के वेद विभागाध्यक्ष डॉक्टर उपेंद्र जी ने भी संबोधित किया। वहीं समारोह में महंत बालकृष्ण यति कन्या महाविद्यालय की छात्राओं द्वारा गीता पाठ किया गया। स्वस्तिवाचन आचार्य मनीष जी व आचार्य शंभू पाठक जी ने किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता अजीत महापात्रा व संचालन महावीर प्रसाद पैन्यूली ने किया। इस अवसर पर नमिता भट्टाचार्य नारायण गुरु जी महाराज, आचार्य रमाशंकर द्विवेदी, काशी हिंदू विश्वविद्यालय वेद विभागाध्यक्ष डॉ उपेन्द्रजी, डॉ राम जी झा ज्योतिषचार्य, डॉ, रत्नाकर त्रिपाठी, पातालपुरी मठ वाराणसी पीठाधीश्वर बालक दास जी महाराज, सन्त सर्वेश्वर सरण, सन्त सियाराम दास जी, अवधकिशोर दास जी, सन्त अवध बिहारी जी, महन्थ उमेश दास जी, डॉ श्रवण दास जी, विजय रामदास जी, सन्त देवरहा जी, सुरेंद्र प्रसाद सिंह, केडी सिंह, मेजर इंद्रजीत सिंह, राजेंद्र सिंह, पारसनाथ पांडेय, डॉक्टर मंजू सिंह, अमिता दुबे इत्यादि मौजूद रहे।

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