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हस्त नक्षत्र में 21 सितंबर से शुरू होगा शारदीय नवरात्र, कलश स्थापना श्रेष्ठ मुहूर्त सुबह 6:29 से 7:47 बजे तक

लखनऊ। पितृपक्ष के बाद शारदीय नवरात्र इस बार 21 सितंबर से शुरु होगी। इस बार नवरात्र हस्त नक्षत्र में शुरु होंगे। इस बार कई वर्ष के बाद नवरात्र हस्त नक्षत्र में शुरू होंगे। इसे श्रेष्ठ बताया जा रहा है। उस दिन सुबह 6.29 से 7.47 तक घट स्थापना का श्रेष्ठ मुहूर्त रहेगा। पंडित ताराचन्द शास्त्री के अनुसार सुबह 6.29 से 7.47 तक घट स्थापना का श्रेष्ठ मुहूर्त है। इसके बाद चौघडिय़ों के अनुसार सुबह 11.01 बजे से दोपहर 3.32 बजे तक चर लाभ अमृत चौघडिय़ा में घट स्थापना होगी। इस बार नवरात्र में घटम बढ़त नहीं होने के चलते इन्हे श्रेष्ठ माना जा रहा है। दुर्गाष्टमी 28 व रामनवमी 29 सितम्बर को मनाई जाएगी। 30 सितम्बर को विजय दशमी का पर्व मनाया जाएगा। शास्त्रों के अनुसार 27 नक्षत्र हैं और अभिजीत को जोडऩे पर 28 हो जाते हैं। इस दिन हस्त नक्षत्र के साथ सूर्य व चन्द्रमा भी कन्या राशि में विद्यमान रहेंगे। अष्टमी, नवमी व दशमी को कन्या पूजन करना श्रेष्ठ है। अष्टमी के दिन मां गौरी की पूजा होगी। जो लोग पूरे नवरात्र व्रत नहीं कर सकते हैं वे अष्टमी व नवमी को व्रत कर इसका फल प्राप्त कर सकते हैं। इसमें भी अष्टमी के दिन व्रत करना श्रेष्ठ माना गया है। शारदीय नवरात्र इस बार 21 सितंबर गुरुवार से शुरू हो रहे हैं। प्रतिपदा तिथि में सुबह सात बजकर अठतीस मिनट पर घटस्थापना का शुभ मुहूर्त है। अश्विन शुक्ल प्रतिपदा से नवमी पर्यन्त नवरात्रि व्रत व दुर्गा पूजन किया जाता है। देहरादून में कई स्थानों पर दुर्गा पूजाएं और जागरण के कार्यक्रम होने हैं। मंदिरों में एक बार फिर से उत्सव का माहौल रहेगा। नवरात्रियों तक व्रत करने से नवरात्र व्रत पूर्ण होता है। शारदीय नवरात्र शक्ति उपासना का समय है। देवी व्रतों में कुमारी पूजन (कन्याओं का पूजन) जरूरी बताया गया है। 2 से 10 साल तक की कन्याओं को देवी मानकर उनको भोजनादि से तृप्त किया जाता है। विद्वानों के अनुसार इन दिनों भू शयन, ब्रह्मचर्य पालन, क्षमा, दया, उदारता पूर्वक रहने, क्रोध, लोभ, मोह का त्याग कर नवमी व्रत का पारण करें तो इससे देवी प्रसन्न होती है। ज्योतिषाचार्य के अनुसार 21 सितंबर को सुबह 10:25 बजे तक प्रतिपदा तिथि रहेगी। रात 11:23 बजे तक हस्त नश्रत्र रहेगा। हस्त नश्रत्र और अभिजित मुहूर्त, द्विस्वभाव लग्न में कलश स्थापना शुभ मानी जाती है। अभिजित मुहूर्त सुबह 11:46 से 12:34 बजे तक रहेगा। सुबह 7:38 से 8:10 बजे तक कन्या लग्न और 12:50 से 1:42 बजे दोपहर तक धनु लग्न में कलश स्थापना (जौ बोना) अधिक शुभ रहेगा। ये समय सभी तरह से दोष मुक्त है। इसके बाद 3:16 बजे तक राहुकाल रहेगा।

 

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