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भदोही में तहसील अफसरों की मौन स्वीकृति हो रहा अवैध अतिक्रमण

भदोही। सूबे के मुख्यमंत्री योगी लगातार भू-माफियाओं और अवैध कब्जाधारकों पर कड़ी कार्यवाही का निर्देश दे रहे हैं । वहीं सरकार अवैध रूप से कब्जाई गई जमीनों को अभियान चलाकर मुक्त कराने का निर्देश भी दे चुकी है । लेकिन भदोही जिले में सब कुछ  इतर होता दिखाई दे रहा है। सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की तो बात छोड़िए, राजस्व कर्मियों की मौन सहमति से कब्जे लगातार बढ़ते ही जा रहे हैं।
भदोही जिले के कोइरौना थाना क्षेत्र निवासी लालचंद पुत्र रामदुलार पाल व उनकी पत्नी सोना देवी अपने कृषि भूमि पर हो रहे कब्जे की शिकायत लेकर तहसील और जिला प्रशासन के चक्कर करीब डेढ़ माह से लगा रही हैं। लेकिन राजस्व विभाग इस तरह हीलाहवाली और लीपापोती कर रहा है जैसे अतिक्रमणकारी पर उनकी गुप्त सहमति हो। भावापुर गांव की खतौनी में खाता संख्या 272 की गाटा संख्या 61 व 73 ऊसर भूमि का कुछ हिस्सा कई वर्ष पूर्व लालचंद पाल व उनकी पत्नी के नाम कृषि कार्य हेतु पट्टा हुआ था। साथ ही पिछले वर्ष उन्होंने कुछ भूमि इसी नम्बर में बैनामा भी कराया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि दूसरे राज्य से आया एक दलित जो पिछले दो चार वर्ष से गांव में बस्ती के बीच मड़हा आदि लगाकर बसा था। करीब डेढ़ माह पूर्व वह बस्ती से काफी दूर गाटा संख्या 61 में लालचंद के हिस्से में कब्जा करने लगा। बोलने पर वह व उसकी पत्नी ने एससीएसटी धारा में फंसाने की धमकी देने लगे। परेशान होकर पीड़ित ने डीएम समेत तहसील प्रशासन का दरवाजा खटखटाना शुरू कर दिया। डीएम के आदेश के बावजूद उसे न ही तहसील प्रशासन का सहयोग मिला और न ही पुलिस ने कोई विशेष रुचि दिखाई। बल्कि पीड़ित को अवैध कब्जे की शिकायत पुलिस से करने का खामियाजा शांति भंग में चालान होने के रूप में भुगतना पड़ा। फिलहाल वह लेखपाल कानूनगो समेत तमाम अधिकारियों के चक्कर लगा रहा है लेकिन मिल रही हैं तो सिर्फ तारीख पे तारीख। तहसील प्रशासन की लीपापोती और लापरवाही का अंदाज वास्तव में बड़ा ही निराला है, कागजों के लकड़पेंच में फंसाकर पीड़ितों को परेशान करना तो कोई उनसे सीखे। पीड़ित द्वारा मामले के सम्बंध में दिए गए शिकायत सन्दर्भ संख्या-40019817001375 में तहसील प्रशासन ने जो आख्या दी वह न सिर्फ सच्चाई से परे है बल्कि आश्चर्य करने वाली भी है। तहसील प्रशासन ने 11 अगस्त को आख्या देते हुए कहा कि ग्रामसभा भावापुर की आराजी संख्या 61 के बावत खतौनी में कुल 18 खाता है। उक्त आराजी में आवेदक की कोई भूमि नही है तथा प्रार्थना पत्र निराधार है। जबकि ताजा उध्दरण खतौनी से यह साफ सिद्ध होता दिख रहा है कि खाता संख्या 272 के आराजी नम्बर 61 में कुल 18 खाते हैं और उसी में पीड़ित लालचंद व उसकी पत्नी सोना देवी को भूमिधर घोषित किया गया है। इसी लचर रैवये और सरपरस्ती का फायदा उठाकर अतिक्रमणकारी लगातार पीड़ित के भूमि में कब्जा करता चला जा रहा है। गलत आख्या लगाने की रिपोर्ट पीड़ित ने जिलाधिकारी से भी की पर समस्या जस की तस बनी रही। पीड़ित तथा पीड़िता ने दो दिन पूर्व शासन से शिकायत कर तहसील प्रशासन पर गलत आख्या देने का आरोप लगाते हुए जांच कराकर प्रभावी कार्रवाई करने तथा भूमि से अवैध कब्जा हटवाकर न्याय दिलाने की मांग की है। इस तरह के मामलों से साफ पता चलता है कि जमाने की तरह ही किस कदर तहसील प्रशासन भी गरीबों पर जुर्म और अमीरों पर मेहरबानी करता है।

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