Breaking News
Home / बलिया / बलिया: शहीद स्मारक के लिए ‘जिम्मेदारों’ को नहीं मिल रही जमीन

बलिया: शहीद स्मारक के लिए ‘जिम्मेदारों’ को नहीं मिल रही जमीन

लक्ष्मणपुर। शहीद स्मारक बनवाने एवं जमीन आवंटन के लिए सात वर्ष से तरस रहा है शहीद परिवार। इसके लिए शहीद की विधवा द्वारा किया जा रहा हर प्रयास जिम्मेदारों की उदासीनता से बेकार हो जा रहा है। जी हां, हम बात कर रहे है केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल अंबिकापुर, सरगुजा, छत्तीसगढ़ में तैनात बड़काखेत, पलियाखास निवासी इन्द्रजीत राम की, जो दंतेवाड़ा नक्सली हमले में छह अप्रैल 2010 को अपने 76 साथियों के साथ शहीद हो गया था। शहीद के अंतिम संस्कार में गंगा तट पर मुखाग्नि देते दो वर्ष के अबोध पुत्र को देखकर उपस्थित हजारों लोगों की आंखे नम हो गई थी। शहीद की विधवा हृदयावती देवी शहीद स्मारक, कृषि योग्य जमीन आवंटन, आवास एवं शहीद के नाम पर सड़क का नामकरण कराने के लिए सात वर्षों से अधिकारियों के कार्यालयों का चक्कर लगा रही है। जहां तक उसे उम्मीद की किरण दिखायी दी, वह फरियाद लगाती रही और हार नहीं मानी। आठ अप्रैल 2010 को शहीद के पार्थिव शरीर पर पुष्प चक्र अर्पित करने पहुंचे तत्कालीन डीएम सेंथियल पांडियन सी ने मौके पर हही मातहतों को शहीद के नाम पर सड़क बनाने का प्रस्ताव बनाकर भेजने का निर्देश दिया था। साथ ही शहीद परिवार को आवास, कृषि योग्य जमीन आवंटन करने तथा शहीद स्मारक बनाने की बात कही गई, लेकिन सात वर्ष बीत जाने के बाद भी शहीद परिवार की सुधि नहीं लिया गया। शहीद की विधवा हृदयावती देवी की शिकायत पर केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल छत्तीसगढ़ की 62वीं बटालियन द्वारा कई बार अपने स्तर से डीएम समेत अन्य अधिकारियों को पत्र भेजा गया। केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल इलाहाबाद ग्रुप परिसर में 27 जुलाई 2017 को स्थापना दिवस का आयोजन किया गया था, जिसमें शहीद की विधवा ने अवगत कराया था कि शहीद परिवार के पास न तो रहने लायक घर है और न ही शहीद के नाम पर सड़क एवं शहीद स्मारक का ही निर्माण कराया गया है। शहीद की विधवा ने क्षेत्रीय विधायक एवं राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) उपेन्द्र तिवारी से मिलकर गुहार लगायी तो मंत्री ने बीडीओ सोहांव को निर्देशित किया कि इन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास उपलब्ध कराया जाय। बावजूद इसके अभी तक शहीद परिवार को अभी तक न तो कृषि योग्य जमीन का आवंटन हो सका है और न ही शहीद के नाम पर सड़क, शहीद स्मारक एवं आवास ही मिल सका है। लक्ष्मणपुर। केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल अंबिकापुर, छत्तीसगढ़ के पत्र के क्रम बलिया का राजस्व विभाग ने जमीन की तलाश शुरू किया। पलियाखास में ग्राम सभा की जमीन नहीं मिली। नरही के लेखपाल ने भी हाथ खड़ा कर दिया। इसके बाद चकबंदी प्रक्रिया में चल रहे खमीरपुर में जमीन की तलाश की जा रही है। आश्चर्यजनक बात यह है कि न्याय पंचायत लक्ष्मणपुर के तहत लक्ष्मणपुर, सरवनपुर, कुल्हड़िया, तेतारपुर, दरियापुर एवं पलियाखास आते है। इन ग्राम सभाओं में ग्राम सभा की पर्याप्त जमीन उपलब्ध है। बावजूद इसके जिम्मेदारों को इन सभाओं में शहीद स्मारक बनाने एवं कृषि योग्य जमीन नहीं मिल रही है। हद तो तब हो गयी जब राजस्व विभाग के कर्मचारियों ने लक्ष्मणपुर न्याय पंचायत के किसी लेखपाल से संपर्क न कर नरही में जमीन की तलाश शुरू कर दिया। जब नरही में भी जमीन नहीं मिली तो इसी गांव के चकबंदी प्रक्रिया में चल रहे मौजा खमीरपुर में जमीन की तलाश होने लगी है। इस संबंध में पलियाखास के लेखपाल अजय कुमार से पूछने पर बताया कि इसके बारे में डीएम को रिपोर्ट भेज दी गई है। शहीद इन्द्रजीत राम की बूढ़ी मां प्रभावती देवी ने बड़े दर्द भरे लहजे में कहा कि यदि हमारे लड़के के नाम पर शहीद स्मारक एवं आवास बन जाता है तो शहीद की विधवा अपने बच्चों के साथ समय काट लेती। शहीद के दो लड़के एवं एक लड़की है। कहा कि राशन दुकान से राशन नहीं मिलता था। इधर, तीन-चार माह से राशन मिल रहा है। भगवान पर पूरा भरोसा है कि वह इसे पूरा करेगा। शहीद की जिक्र होते ही बूढ़ी मां की ममता छलक पड़ी।

About admin

Check Also

चंदौली: घर में खाना बना रही दलित किशोरी संग दुष्कर्म

सकलडीहा/धानापुर। सकलडीहा कोतवाली क्षेत्र के एक गांव में बुधवार को सुबह साढ़े आठ बजे घर …