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लखनऊ: अर्पणा यादव के गौशाला के पशुओं को बजट के आभाव में मिल रहा है आधा पेट भोजन

लखनऊ। सरोजनीनगर स्थित ‘कान्हा उपवन’ में 6 महीने से गोवंशीय (गाय और सांड) सहित कुल 3030 जानवरों को आधा पेट खाना मिल रहा है। कान्हा उपवन का संचालन करने वाली संस्था जीवाश्रय के पास चारे के लिए बजट नहीं है। जीवाश्रय के सेक्रटरी यतीन्द्र त्रिवेदी ने 4 नवंबर 2017 के बाद कान्हा उपवन के संचालन का काम छोड़ने का अल्टीमेटम भी दे चुके हैं। यूपी सरकार के पशुधन मंत्री एसपी सिंह बघेल पर ये आरोप लगाया है कि बजट रोक रखा है। बता दें, जीवाश्रय संस्था से मुलायम की छोटी बहू अपर्णा यादव भी जुड़ी हैं। यतीन्द्र त्रिवेदी के मुताबिक, ‘वर्ष 2016-2017 में शासन की तरफ से कान्हा उपवन को 2.50 करोड़ का बजट मिला। 30 मार्च 2017 को ये बजट खत्म हो गया।”इस बात की जानकारी नगर निगम से लेकर शासन तक को दी गई, लेकिन वहां से केवल आश्वासन मिला। बजट खत्म होने से गोवंशीय (गाय और सांड) सहित कुल 3030 जानवर 6 महीने से आधे पेट भोजन करने को मजबूर हैं।’ यतीन्द्र ने बताया- ‘वो इस संबंध में पशुधन मंत्री एसपी सिंह बघेल से लेकर सीएम योगी तक को लेटर लिख चुके हैं।”1 अप्रैल 2017 को जीवाश्रय संस्था की तरफ से शासन को लेटर लिखा गया, लेकिन उसका कोई जवाब नहीं आया।”18 अगस्त 2017 को दूसरा लेटर सीएम योगी आदित्‍यनाथ को लिखा गया, वहां से भी कोई जवाब नहीं आया।”तीसरा लेटर नगर आयुक्त को लिखा गया और जरूरी कदम उठाने की मांग की गई। नगर निगम की तरफ से कोई जवाब नहीं आया। न ही कोई अधिकारी जानवरों का हाल जानने के लिए आया।’यतीन्द्र के मुताकिब, ‘प्रमुख सचिव नगर विकास और पशुधन मंत्री एसपी सिंह बघेल ने कान्हा उपवन को अनुदान देने से मना कर दिया है।’ ‘प्रमुख सचिव नगर विकास ने 3 अक्टूबर को साफ कर दिया कि गोवंशीय पशुओं के चारे के लिए राज्य सरकार के पास कोई अनुदान नहीं है।’ ‘इसके बाद पशुपालन मंत्री एसपी सिंह बघेल से मुलाक़ात हुई तो उन्होंने ने कहा कि यूपी में 470 गौशालाएं हैं तो हम सिर्फ आपको ही पैसा क्यों दें? हमारे पास कान्हा उपवन जैसी भूमि है, लेकिन जीवाश्रय संस्था ने उसपर अवैध कब्जा किया है। अगर हम इस जमीन को बेच दें तो कितने करोड़ रुपए मिल जाएंगे।’ उन्होंने बताया- ‘कान्हा उपवन में 1 अप्रैल से 10 अक्टूबर 2017 तक कुल 400 पशुओं की डेथ हो चुकी है। सबकी डेथ का कारण अलग-अलग है।’ ‘हालांकि, अभी तक किसी जानवर की डेथ भूख की वजह से नहीं हुई है। लेकिन अगर जल्द कोई व्यवस्था नहीं की गई तो शायद ये दिन भी देखना पड़े।’कान्हा उपवन के हॉस्पिटल में चार पशु चिकित्सक हैं। उनकी सैलरी 25 से 30 हजार है। 20 पैरामेडिकल स्टाफ भी हैं। उनकी सैलरी 8 हजार से लेकर 14 हजार तक है।1 फार्मासिस्ट और 8 सुपरवाइजर हैं। फार्मासिस्ट की सैलरी 12 हजार और सुपरवाइजर की सैलरी 8 से 12 हजार है।’ ‘जानवरों की हेल्प के लिए एक काल सेंटर भी जीवाश्रय संस्था की तरफ से चलाया जा रहा है। जिसमें 11 लोग काम करते हैं। इनको 6 से 10 हजार रुपए सैलरी दी जाती है।’जीवाश्रय संस्था की ओर से 44 लोग काम करते हैं। वहीं, नगर निगम की ओर से 120 लोग कान्हा उपवन में लगाए गए हैं। इस तरह से कुल 164 कर्मचारी कान्हा उपवन में काम करते थे। लेकिन बजट न मिलने की वजह से जीवाश्रय संस्था की ओर से काम करने वाले 44 लोगों को 6 महीने से सैलरी नहीं मिल सकी, जिस वजह से उन्हें काम छोड़ना पड़ा। दरअसल, इन सबकी सैलरी का भुगतान कान्हा उपवन को मिले बजट से ही किया जाता था।”हम अपनी आंखों के सामने पशुओं को मरते हुए नहीं देख सकते। इसलिए उधार मांग कर जानवरों को चारा खिला रहे हैं।’ ‘कान्हा उपवन पर चारे का 2 करोड़ से ज्यादा का बकाया हो चुका है। चारा सप्लाई करने वालों ने पैसे न देने पर किसी भी वक्त सप्लाई ठप करने की चेतावनी दे दी है।’हमारे यहां 2700 गोवंशीय, 300 कुत्ते और बाकी अन्य जानवर हैं। सरकार की तरफ से 2016-17 में 2700 गोवंशीय के लिए प्रति गोवंशीय 50 रूपए के हिसाब से 2 करोड़ 55 लाख का बजट मिला था।जबकि प्रति गोवंशीय खाने पर हमारी संस्था की तरफ से 60 रुपए का खर्च आता है। इस तरह हमारा गोवंशीय के खाने पर सालाना खर्च 2.87 करोड़ रुपए आता है। बजट में जो पैसा कम पड़ता है उसे हम दान और लोगों से मदद मांगकर पूरा करते हैं।कान्हा उपवन में जानवरों के ट्रीटमेंट के लिए एक हॉस्पिटल और 3 एम्बुलेंस हैं। एम्बुलेंस में एक ड्राइवर, एक ईएमटी और एक हेल्पर चलते हैं। उनको 6 महीने से वेतन नहीं मिला है।’इसी तरह कॉल सेंटर में 11 वर्कर हैं। उन्हें भी पिछले 6 महीने से सैलरी नहीं मिली है। एम्बुलेंस में डीजल और पेट्रोल भराने के लिए पैसे खत्म हो चुके हैं। इसीलिए ये सभी सेवाएं बंद कर दी गई हैं।यतीन्द्र ने बताया- ‘कान्हा उपवन 240 एकड़ में फैला हुआ है। इसके अंदर एक तालाब और हॉस्पिटल भी हैं। इसकी स्थापना के पीछे आवारा पशुओं को बेहतर जीवन जीने योग्य वातावरण मुहैया कराना था।”2012 से पहले तक नगर निगम ही कान्हा उपवन का संचालन करता था। उस वक्त यहां पर 650 गोवंशीय हुआ करते थे।’
– ‘2012 में जब लखनऊ में अनुराग यादव डीएम बनकर आए तो उन्होंने नगर निगम के साथ मिलकर तीन महीने तक कान्हा उपवन का संचालन किया था।तब मैं कान्हा उपवन में वॉलंटियर के तौर पर काम करता था। हमारे जैसा कुछ और लोग यहां पशुओं की सेवा का काम करते थे। डीएम ने हमें बुलाकर कहा कि तुम लोग पशुपालन आयोग से रजिस्ट्रेशन कराकर कोई संस्था बना लो। उसके बाद कान्हा उपवन के संचालन की जिम्मेदारी मैं तुम्हे सौंप दूंगा। अनुराग यादव की पहल पर 2012 में जीवाश्रय  नाम की संस्था का गठन किया गया और उसके कुछ दिनों बाद ही हमारी संस्था को कान्हा उपवन के संचालन की जिम्मेदारी मिल गई।2012 तक यहां पर कुल पशुओं की संख्या 650 थी। ये संख्या 2017 में बढ़कर 3 हजार के पार पहुंच चुकी है।’

– ‘मुलायम सिंह के छोटे बेटे प्रतीक यादव का जनवरों से लगाव है। वे अपनी शादी से पहले से कान्हा उपवन आते रहते थे। जब से अपर्णा यादव से शादी हुई, उनके साथ वे भी यहां आने लगीं।कान्हा उपवन का बजट न जारी होने पर 9 अक्टूबर को अपर्णा और प्रतीक दोनों ही मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍य नाथ से मिले थे। उन्होंने सीएम को इस बारे में अवगत कराते हुए मदद करने की गुहार लगाई थी।सीएम योगी आदित्यनाथ और डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा दोनों ही कान्हा उपवन का दौरा कर चुके हैं।  सीएम जब कान्हा उपवन आए थे तब उन्होंने यहां के पशुओं के रहने और खाने की व्यवस्था को देखकर काफी ख़ुशी जाहिर की थी। योगी ने कान्हा उपवन में पशुओं को अपने हाथों चारा भी खिलाया था।

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