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लखनऊ: पुलिस के लिए चुनौती है बांग्‍लादेशियों को यूपी से खदेड़ना

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अवैध तरीके से रह रहे बांग्लादेशियों को सूबे खदेड़ने का निर्देश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस को दिया है। लेकिन इस निर्देश पर अमल करना पुलिस के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। दरअसल पुलिस के पास ऐसा कोई आंकड़ा नहीं है जिससे पता किया जा सके कि प्रदेश में अवैध रूप से कितने बांग्लादेशी रह रहे हैं। पुलिस के सामने दूसरी सबसे बड़ी चुनौती यह है कि जितने भी बांग्लादेशी प्रदेश में हैं उन्होंने किसी न किसी तरह से राशन कार्ड, वोटर आईडी, आधार कार्ड या अन्य पहचान पत्र बनवा रखा है. जिसकी वजह से उन्हें निकालने में कानूनी पेंच फंस सकता है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में हजारों बांग्लादेशी झुग्गी-झोपड़ियों में रहते हैं। उनमें से ज्यादातर लोगों के पास पहचान और निवास पत्र मौजूद है। पुलिस पहले भी बांग्लादेशियों को वापस भेजने की कोशिश कर चुकी है, लेकिन भारतीय निवास प्रमाण पत्र होने के नाते कोर्ट से उन्हें राहत मिल गई थी। कहा यह भी जा रहा है कि राजनीतिक स्वार्थ के लिए कुछ लोगों ने इनके वोटर कार्ड बनवा दिए। अनुमान के मुताबिक ऐसे बांग्लादेशियों की संख्या महज 10 से 15 प्रतिशत ही होगी जिनके पास पहचान पत्र न हो। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक इन झुग्गी-झोपड़ियों में रह रहे बांग्लादेशी देश और प्रदेश की सुरक्षा के लिए खतरा हैं. अभी हाल ही के दिनों में यूपी एटीएस ने अंसारुल्लाह बांग्ला टीम के कुछ सदस्यों को गिरफ्तार किया था, जिनके पास से आधार और वोटर आई कार्ड बरामद हुए थे। लखनऊ में पड़ी कई डकैतियों में भी इनके शामिल होने की पुष्टि हुई थी। कहा तो यह भी जा रहा है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में रोहंगिया भी रह रहे हैं। कुछ अधिकारीयों का कहना है कि इन्हें निकालना आसान नहीं है। क्योंकि इनकी पहुंच लोगों के किचन से लेकर बेडरूम तक है। ये लोग लोगों के घरों में खाना बनाने, साफ-सफाई और बर्तन धोने का काम करते हैं। हालांकि एडीजी लॉ एंड आर्डर आनंद कुमार का कहना है कि मुख्यमंत्री के निर्देशों का पालन करवाया जाएगा।

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