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सिकरौरा कांड: बाहुबली एमएलसी बृजेश सिंह कोर्ट में बालिक साबित

वाराणसी। बलुआ (चंदौली) में 31 साल पहले हुए बहुचर्चिच सिकरौरा नरसंहार कांड की सुनवाई में तेजी आ गयी है। अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम पीके शर्मा की कोर्ट ने वादिनी हीरावती को बयान दर्ज कराने के लिए 23 अक्टूबर को तलब किया है। कोर्ट ने आदेशित करते हुए कहा कि इस मामले में साक्ष्य हेतु सम्मन जारी किया गया है। पिछले कई महीनों से मामला ठंडे बस्ते में पड़ा था। माफिया से माननीय बने एमएलसी बृजेश सिंह ने वारदात को समय खुद को नाबालिग घोषित करने के लिए प्रार्थनापत्र देकर इसे नया मोड़ दे दिया था लेकिन पिछली तिथि पर इसका निस्तारण होने के बाद सुनवाई शुरू होनी है। बचाव पक्ष इसकी काट तैयार करने में जुटा है और आदेश के खिलाफ अपील होना तय है। वर्ष 1986 में हुए 7 लोगो के नरसंहार कांड में बीते दिनों आरोपी एमएलसी बृजेश सिंह को कोर्ट ने लम्बी सुनवाई के बाद घटना के समय बालिक घोषित किया था। इसके बाद मामले के ट्रायल का रास्ता साफ हो गया था। इसी क्रम मे वादिनी के अधिवक्ता अमरेंद्र विक्रम सिंह ने मृतक रामचंद्र यादव की पत्नी हीरावती को बयान दर्ज करने के लिए सम्मन जारी करने का अनुरोध किया था जिस पर सिकरौरा निवासनी वादिनी को 23 अक्टूबर को बयान दर्ज करने के लिए कोर्ट ने तलब किया। इसी के साथ 31 वर्ष पुराने मामले के ट्रायल का रास्ता साफ हो गया। दरअसल बृजेश की भुवनेश्वर (उड़ीसा) में नाटकीय ढंग से गिरफ्तरी के बाद दूसरे प्रांतो में दर्ज मामलों का निस्तारण हो चुका था लेकिन सिकरौरा कांड की सुनवाई तक नहीं शुरू हुई थी। बनारस में यह मामला हीरावती की हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करने के बाद मामले की सुनवाई के लिए शुरू हुआ था।

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