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काशी विद्यापीठ विश्वाविद्यालय में एबीपी और समाजवादी छात्रसभा आमने-सामने

वाराणसी। केन्द्र और प्रदेश की सत्ता में प्रचंड बहुमत हासिल करने वाली भाजपा के नेता वहीं कहानी छात्र राजनीति में दोहराने का सपना देख रहे हैं लेकिन उन्हें हर स्थान पर मुंह की खानी पड़ रही है। वजह, उन्हें लगता है कि छात्रसंघ चुनाव में भी पीएम मोदी के नाम पर वोट मिलेंगे। अति आत्मविश्वास का नतीजा है कि जिताई के बदले जुगाड़ू प्रत्याशियों को मैदान में उतार दिया जा रहा है। गाजीपुर के स्वामी सहजानंद पीजी कालेज में भाजपा जिलाध्यक्ष ने अपने रिश्तेदार को टिकट दिला दिया जो तीसरे नंबर पर रहा। यही कहानी इलाहाबाद विश्वविद्यालय में दोहरायी गयी जब नामांकन से पहले मृत्युंजय नारायण का टिकट काट कर प्रियांका सिंह को थमा दिया। प्रियंका भी तीसने स्थान पर रही। कमोवेश यही स्थिति काशी विद्यापीठ में देखने को मिल रही है जिसके चुनाव कार्यक्रम की रविवार को घोषणा कर दी गयी है। दूसरे छात्रसंघ चुनावों में भले राजनैतिक दलों की दिलचस्पी न हो लेकिन पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र में भाजपा को किसी मोर्चे पर दांव देने के लिए हर दांव अपनाये जाते हैं। पिछली बार यहां के छात्रसंघ चुनाव में एबीवीपी के दो पैनल लड़े थे और जिला पंचायत अध्यक्ष अपराजिता सोनकर के भाई को समाजवादी छात्रसभा के पैनल से जीत हासिल हो गयी थी। इस बार भी दो गुटों ने ताल ठोंकनी शुरू कर दी है। दोनों संघ के नेताओं से लेकर मंत्रियों के करीबी होने का दावा कर रहे हैं। दूसरी तरफ समाजवादी छात्रसभा का एक पैनल अब तक मैदान में हैं और पूरे जोरशोर से प्रचार में जुटा है। काशी विद्यापीठ में चुनाव कार्यक्रम कुछ इस तरह से हैं। नामांकन 25 अक्टूबर से आरम्भ होगे और अगले दिन पर्चे की जांच की जायेगी। एक दिन वापस लेने का मौका दिया जायेगा और 3 नवंबर को मतदान होगा। इससे पहले उदय प्रताप महाविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव होने हैं और लगभग 15 नवंबर के आसपास हरिश्चंद्र पीजी कालेज का छात्रसंघ चुनाव होगा। भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपनी प्रतिष्ठा बचाने की है। जनपद की सभी विधानसभा सीटों पर जीत हासिल करने के साथ समीपवर्ती जनपद के सांसद डा. महेन्द्रनाथ को प्रदेश अध्यक्ष बना दिया है। फिलहाल चुनावों के जो भी समीकरण बन रहें है उसमें भाजपा को मुंह की खानी पड़ रही है। कई विधायकों ने मिल कर जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया और सहयोगी दलों ने मिल कर इस पर पानी फेर दिया। उधर चंदौली में सांसद के बाई के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित होने के कगार पर हैं और सिर्फ घोषणा बाकी है। निकाय चुनाव का समय चल रहा है और ऐसे में छात्रसंघ की हार पार्टी के लिए करारा ढटका हो सकती है।

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