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निलंबित एआरटीओ आरएस यादव के करीबियों पर भी पुलिस का शिकंजा, आय से अधिक मामले में होगी जांच

वाराणसी। मीर्जापुर जेल में कदाचार के मामले में निरुद्ध निलंबित एआरटीओ आरएस यादव की तरफ से हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर है। वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल चतुर्वेदी उनकी तरफ से पैरवी कर रहे हैं। मामले को लेकर ढिलाई की शिकायतों को शासन ने गंभीरता से लिया है। इस मामले में शासन ने एक बार फिर से दखल देते हुए कार्रवाई का दायरा बढ़ाने के निर्देश दिये हैं। सूत्रों की माने तो आरएस यादव ही नहीं बल्कि उनके करीबियों के खिलाफ आय से अधिक सम्पति का मामला दर्ज होने जा रहा है। इसकी पूरी तैयारी हो चुकी है और माना जा रहा है कि भष्टाचार के एक मामले में वह जमानत ले इससे पहले दूसरा बड़ा मामला रोजमानचे पर आ जायेगा। गौरतलब है कि चंदौली में टोकन के जरिये ओवरलोड वाहनों के संचालन के मामले में पुलिस ने एआरटीओ के सिपाही और ड्राइवर को गिरफ्तार करने के साथ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया था। मौके से आरएस यादव की गिरफ्तारी नहीं हुई थी और गिरफ्तार लोगों के बयान के आधार पर उनके खिलाफ सजिश रचने की धाराएं लगायी गयी थी। मामला दर्ज होने के कुछ दिन बाद शासन ने इसकी जांच विजलेंस को सौंप दी। विजलेंस ने अपनी जांच में कदाचार और आय से अधिक सम्पति को अलग रखा है। पिछले सप्ताह विजलेंस के अधिकारी-विवेचक लखनऊ बुलाये गये थे और उन्हें इस बाबत सख्त निर्देश दिये गये। इसके बाद मामले में तेजी आ गयी और माना जा रहा है कि एक सप्ताह में जो मामला दर्ज होगा उसमें समूची सम्पति की फेरहिस्त के संग करीबियों का भी कच्चा-चिट्ठा रहेगा। अरबपति एआरटीओ कहे जाने वाले आरएस यादव की गिरफ्तारी के बाद शहर ही नहीं बल्कि पूर्वांचल के सफेदपोशों में खलबली मची थी। मैनेज करने के लिए चर्चित लोगों ने हामी ङी भरी थी। का्रफी दिनों तक इसे लेकर हलचल रही लेकिन किसी और के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो सभी अपने ढर्रे पर लौटने लगे। सूत्रों की माने तो नये मामले में आरेस ने कहां निवेश किया है और कौन उन्हें साझीदार बनाये हैं इसका खुलासा हो सकता है। आरएस यादव के खिलाफ एक के बाद एक कर तीन मामले दर्ज करने के बाद चंदौली पुलिस सुर्खियों में आयी थी लेकिन बाद में इसकी विवेचना जिस तरह चल रही है उससे वह सवालों के घेरे में है। गौरतलब है कि चंदौली में जो तीसरा मुकदमा दर्ज हुआ उसमें कांस्टेबिल अजीत व देवनारायण भी आरोपित थे। लंबे समय तक पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार नहीं किया। पहले एक ने अरेस्ट स्टे ले लिया और उसके बाद दूसरे ने। बताया जाता है ढुलमुल रवैये से आला अफसर सख्त नाराज है और इस मामले में चार्जशीट दाखिल करने के आदेश दिये हैं। दोनों के खिलाफ आरोपपत्र दायर करने की विभागीय स्वीकृति मिल चुकी है इसके होने के साथ गिरफ्तारी का रास्ता खुल जायेगा।

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