Breaking News
Home / धर्म / स्वामी स्वरुपानंद सरस्वती का ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य पद पर चयन अवैध- प्रो. शंभूनाथ उपाध्याय

स्वामी स्वरुपानंद सरस्वती का ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य पद पर चयन अवैध- प्रो. शंभूनाथ उपाध्याय

वाराणसी। ज्योतिष पीठ के नये शंकराचार्य को लेकर पिछले कई दिनों से चल रही कवायद में नया मोड आ गया है। तमाम प्रक्रिया को दरकिनार करते हुए भारत धर्म महामंडल के एक गुट ने जगद्गुरु स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती को ज्योतिष पीठ का शंकराचार्य चुन लिया। डिपार्टमेंटल सेक्रेटरी शंभूनाथ चतुर्वेदी की तरफ से शुक्रवार को बुलाई गई मंत्री सभा ने तीनों पीठों के शंकराचार्यों, विद्वानों के अभिमत का हवाला देते हुए सर्वसम्मति से ज्योतिष पीठ पर स्वरूपानंद का अभिषेक करने का निर्णय लिया। दूसरी तरफ शंकराचार्य के चयन पर विद्वानों के सुझाव आमंत्रित करने वाले महामंडल के जनरल सेक्रेटरी ने सात दिसंबर को मंत्री सभा की बैठक का एजेंडा जारी किया है। खास यह कि भारत धर्म महामंडल के कार्यालय परिसर में एक तरफ डिपार्टमेंटल सेक्रेटरी की ओर से बुलाई गई मंत्री सभा की बैठक में स्वामी स्वरूपानंद को ज्योतिष पीठ का शंकराचार्य चुना जा रहा था वहीं दूसरी तरफ जनरल सेक्रेटरी प्रो. शंभूनाथ उपाध्याय की ओर से महामंडल भवन की दीवार पर इस बैठक के अवैधानिक होने का नोटिस चस्पा किया गया। गौरतलब है कि स्वरूपानंद द्वारिका-शारदा पीठ के भी शंकराचार्य हैं। ज्योतिष पीठ को लेकर विवाद में हाईकोर्ट ने 22 सितंबर को इस पद पर दावा करने वाले स्वामी स्वरूपानंद और स्वामी वासुदेवानंद को अयोग्य ठहराते हुए नए सिरे से शंकराचार्य का चयन करने के लिए भारत धर्म महामंडल को नामित किया था। इसके लिए प्रक्रिया आरम्भ की गयी थी और कई लोगों ने आवेदन किया था। नाटकीय घटनाक्रम में धर्म महामंडल के डिपार्टमेंटल सेक्रेटरी शंभूनाथ चतुवेर्दी की ओर से जारी एजेंडे के तहत शाम चार बजे लहुराबीर स्थित कार्यालय में नेशनल कौंसिल की बैठक शुरू हुई। इसमें 38 सदस्यीय मंत्री सभा में से 17 सदस्य उपस्थिति का दावा किया गया। यही नहीं पांच सदस्यों ने प्राक्सी वोट की बात कही गयी। महामंडल के उपाध्यक्ष शशिनंदन दर की अध्यक्षता में हुई बैठक में 11 अक्तूबर को हुई बैठक के मिनट्स की पुष्टि की गई। इसके बाद एजेंडा पढ़कर सुनाया गया। इसके बाद ध्वनिमत से मंत्री सभा के बहुमत के आधार पर चार मई, 1941 की धारणा के तहत हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में निर्णय लिया गया। घटनाक्रम की भनक लगने के बाद जारी नोटिस में जनरल सेक्रेटरी की तरफ से कहा गया है कि 24 नवंबर को डिपार्टमेंटल सेक्रेटरी की ओर से बुलाई गई बैठक का एजेंडा निरस्त किया जा चुका है। बावजूद इसके यदि बैठक की जाती है तो इसमें लिए गए निर्णय असंवैधानिक माने जाएंगे। इसके साथ ही बैठक में किसी भी पदाधिकारी, सदस्य को उपस्थित न होने की अपील भी की गई है।

About admin

Check Also

मिर्जापुर: दस मृतक श्रद्धालुओं को मुख्यमंत्री राहत कोष से ढाई-ढाई लाख रूपये व घायलों को मिलेंगे 25 हजार रूपये

मडिहान ( मिर्जापुर )। जिले के मड़िहान थाना क्षेत्र में ट्रक और ट्रैक्टर की सोमवार …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *