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बाबा साहब के परिनिर्वाण दिवस पर बोले वक्ता… लोकतंत्र व संविधान की रक्षा जरूरी

बलिया। बोद्धसत्व बाबा साहब डा. भीमराव अम्बडेकर जी के परिनिर्वाण दिवस के अवसर पर स्थानीय कलेक्ट्रेट स्थित डा. अम्बेडकर संस्थान प्रतिमा पर फूल माला के साथ श्रृद्धाजंलि अर्पित की गयी। गोष्ठी में देश में उत्पन्न राजनैतिक, समाजिक, आर्थिक, शैक्षिक विकट परिस्थितियों से निजात पाने के लिये बाबा साहब के विचार की प्रासंगिकताओं पर बल दिया गया।

इस दौरान आयोजित गोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि बाबा साहब की मान्यता रही कि धर्म सम्प्रदाय की राजनीति देश में सक्रिय हो जायेगी, जो लोकतंत्र और संविधान के लिए ठीक नहीं है। आज यह कहना गलत नहीं होगा कि लोकतंत्र व संविधान दोनों खतरे में है, जिसको बचाने के लिए लोकतंत्र प्रेमियों को आगे आना होगा। गोष्ठी में रामलगन बौद्ध, राजेश, बेचू, गुलबदन बौद्ध, वकील राम, बीरबहादुर, पतिराम, विजयशंकर, सुदामा प्रसाद, लाला जी, लक्ष्मीनारायण चौहान इत्यादि मौजूद रहे। अध्यक्षता डा. एस. प्रताप वैद्य जी तथा संचालन रामदेव ने किया। उधर, संविधान निर्माता डा. भीमराव अम्बेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस पर कांग्रेस भवन में मनाया गया। कार्यवाहक अध्यक्ष बृजेश सिंह गाट की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में संविधान निर्माता के चित्र पर पुष्पाजंलि अर्पित की गयी। श्री गाट ने कहा कि इंसान को इंसान का दर्जा दिलाने वाले, मानवता का पाठ पढ़ाने वाले, महिलाओं को नारकीय जिदंगी से मुक्ति दिलाने वाले बोधिसत्व, भारत रत्न, ज्ञान के प्रतीक बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस पर हम सभी उनके पद चिन्हों पर चलने का कार्य करें। शैलेन्द्र सिंह पप्पू, रौशन सिंह चन्दन, सुजीत पाठक, जितेन्द्र राय, प्रवीण, अमीत, अजय मिश्रा, विशाल चौरसिया, आशुतोष पांडेय, निर्मला साहनी, सुदर्शन पहलवान, प्रिंस पाठक, सत्यम चौरसिया इत्यादि मौजूद रहे। संचालन हरीश कुमार ने किया। वही, अखिल भरतीया विद्यार्थी परिषद कार्यकताओं द्वारा बाबा साहेब अम्बेडकर के परिनिर्वाण दिवस पर सतीश चन्द्र कालेज में पुष्पाजंली कर गोष्ठी का कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। संदीप पांडेय ने कहा कि बाबा साहब बहुत बड़े समाज सुधारक और लेखक भी थे। उन्हें 10 भाषाओं का ज्ञान था। उनके लिखे हुए महान भारतीय संविधान को भारत का राष्ट्रग्रंथ माना जाता है। बाबा साहब ने छुआ-छुत व अछूतों को भी हिन्दू मंदिरो में प्रवेश करने का अधिकार दिलाने के लिये संघर्ष किया। अमन तिवारी, आनन्द सिंह, डिक्की सिंह, मानवेन्द्र, अमित सिंह, दुर्गेश, मनीष, अंकित, मुकेश साहनी, नवीन तिवारी, पिन्टू राय, बब्लू, संजय गुप्त, इमरान खां, सोनू इत्यादि मौजूद रहे। संचालन शिवम मिश्र ने किया।

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