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मैं भले ही जमीं पर रहूं दोस्तों, चाहता हूं…

बलिया। नगर से सटे मिड्ढा में स्थित श्री रणजीत ग्रामोदय इंटर कालेज के संस्थापक स्व. रणजीत सिंह की द्वितीय पुण्यतिथि पर काव्यांजलि समारोह का आयोजन किया गया। इसकी अध्यक्षता बलवंत कुमार सिंह व संचालन डॉ. भोला प्रसाद आग्नेय ने की।

काव्यांजलि में जनाब हफिज मस्तान ने अपनी रचना मिलजुलकर रहना है सबको, विनती ये मस्तान की है। इसी में इज्जत देशवासियों पूरे हिन्दुस्तान की है पढ़ी। शायर लाल साहब ने कामचोरी व मुनाफाखोरी पर प्रहार करते हुए अपनी रचना मालिक ऐसा काम दो मेहनत कोसो दूर, बिन मेहनत मुद्रा मित्रों सोहरत भी भरपूर, कवि रामप्रसाद सरगम ने वर्तमान राजनीति का चित्रण अपनी कविता क्या पता था कि वह शूल बन जायेंगे, आम की जगह बबूल बन जायेंगे से किया। अशोक कंचन जमालपुरी ने अपनी गजल मैं भले ही जमीं पर रहूं दोस्तो, चाहता हूं तुझे  चांद पर देखना, कवि गोवर्धन भोजपुरी ने सरकार पर अपनी रचना योगी योग रमा को चल गइल इंद्रासन में, उत्तर प्रदेश के शासन में से व्यंग कसा। विद्यालय के प्रबंधक जेपी सिंह ने सभी कवियों व शायरों के अलावा छात्रों को गोल्ड मेडल, स्मृति चिन्ह व अंगवस्त्रम से सम्मानित किया। इससे पहले उपस्थित लोगों ने सचिदानंद पाठक, रणजीत सिंह, विनायक नाथ उपाध्याय, राघवेन्द्र प्रताप सिंह इत्यादि ने पुष्पांजलि अर्पित की।

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