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छोटे अपराध पर दरोगाओं व कांस्टेबलों को ट्रेनिंग से नहीं रोका जा सकता

इलाहाबाद, । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 2011 पुलिस भर्ती में चयनित दो पुलिस उपनिरीक्षकों एवं दो कांस्टेबलों को आपराधिक मुकदमे में लिप्त होने के आधार पर प्रशिक्षण रोकने के खिलाफ याचिका पर राज्य सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट ने याचियों को प्रशिक्षण पूरा करने का भी आदेश देते हुए कहा कि नियुक्ति याचिका के अन्तिम निर्णय पर निर्भर करेगी। यह आदेश न्यायमूतर्ति पी.के.एस.बघेल ने दरोगा आलोक कुमार व पवन कुमार तथा कांस्टेबल धर्मेन्द्र कुमार यादव व अनुज कुमार की याचिका पर दिया है। याचिका पर अधिवक्ता विजय गौतम ने बहस की। याची आलोक कुमार का कहना है कि उनके खिलाफ इटावा के एकदिल थाने में दहेज उत्पीड़न के आरोप में प्राथमिकी दर्ज है। सुप्रीम कोर्ट के पुलिस आयुक्त संदीप कुमार केस में राहत दी है। याची ने कोई तथ्य छिपाया नहीं है। दरोगा पवन कुमार के खिलाफ मारपीट का मुकदमा दर्ज है। कोर्ट ने अपराध छोटा माना और कहा कि याची को प्रशिक्षण पर भेजा जाए। कांस्टेबल धर्मेन्द्र कुमार यादव पर भी मारपीट का आरोप है। कोर्ट ने देवरिया के एसएसपी को आदेश दिया है कि उसे प्रशिक्षण पर भेजा जाए। कांस्टेबल अनुज कुमार पर भी मारपीट का सामान्य अपराध का आरोप है। कोर्ट ने याचियों पर छोटे अपराध के आरोप को देखते हुए प्रशिक्षण पूरा करने का निर्देश दिया है। याचिका की सुनवाई 5 सितम्बर को होगी।

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