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रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा के विवादित बयान पर कोर्ट की सुनवाई 13 जुलाई को

वाराणसी। बीएचयू में शताब्दी वर्ष पर डाक टिकट व सिक्का जारी करने के लिए आयोजित समारोह में इलाहाबाद को लेकर की गयी रेल राज्य व संचार मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) मनोज सिन्हा की टिप्पणी उनके लिए गले की फांस बन गयी है। मनोज सिन्हा ने इसे सुप्रसिद्ध साहित्यकार धर्मवीर भारती को कोट करते हुए कहा था लेकिन अगले ही दिन पत्नी पुष्पा भारती समेत दूसरे प्रमुख लोगों ने एतराज जताया। बात यही तक सीमित नहीं रही बल्कि शुक्रवार को मनोज सिन्हा के खिलाफ एसीजेएम (नवम) की अदालत में परिवाद दाखिल कर दिया गया है। वादी प्रेमप्रकाश यादव ने रेल राज्‍य मंत्री के खिलाफ मुकदमा संख्‍या 96/2017 के तहत प्रार्थना पत्र दिया है कि रेल राज्‍य मंत्री मनोज सिन्‍हा का बयान निंदनीय है और समाज के लिए घातक है। शनिवार को एसीजीएम कोर्ट में सुनवाई के तहत पाया गया कि इस मुकदमा का घटना स्‍थल लंका थाना क्षेत्र में हैं चुंकि लंका थाना क्षेत्र के मुकदमें दूसरी कोर्ट देखती है। इसलिए इस मुकदमें की फाइल उस कोर्ट में स्‍थानांन‍तरित कर दी जाय। कोर्ट ने अगली सुनवाई 13 जुलाई को तय किया है। परिवाद में 28 जून को बीएचयू में अयोजित समारोह के दौरान मनोज सिन्हा की टिप्पणी ‘इलाहाबाद बहुत हरामजादा शहर है’ पर एतराज जताते हुए कहा गया कि इससे तमाम लोग मर्माहत हैं। यह धर्मवीर भारती ही नहीं बल्कि प्रगतिशील साहित्यकारों व उनके विचारों को साजिशन अपमानित करते हुए मानहानि की गयी है। परिवादी प्रेम प्रकाश सिंह यादव ने खुद को धर्मवीर भारती का अनुयायी और समर्थक बताया है। अधिवक्ता जन के सचिव परिवादी का कहना है कि धर्मवीर भारती के विचारों को न्याय दिलाने तक संघर्ष जारी रहेगा। मामला जिस तरह तूल पकड़ रहा है उससे मनोज सिन्हा की मुश्किलें बढ रही हैं।

 

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