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सरकार खोलेगी 1000 सरकारी मेडिकल स्टोर, तीन हजार का लक्ष्य

लखनऊ । आम जन का सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने के लिये सरकारी मेडिकल स्टोर खोले जायेगे। पहले चरण में सरकारी अस्पताओं और सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों के पास एक हजार ऐसे मेडिकल स्टोर खोले जायेगे जहां 60 प्रतिशत से भी कम दर पर दवाएं उपलब्ध करायी जायेगी। इसके लिये प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना को प्रदेश में लागू किया जायेगा। जिसके लिये गुरुवार को स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह और केन्द्रीय रसायन एवं उर्वरक राज्यमंत्री  मनसुख एल मन्दाविया की उपस्थित में एक एमओयू पर हस्ताक्षर किया गया। इस मौके पर परियोजना की वेबसाइट का भी शुभारंभ किया गया। इस योजना की जानकारी देते हुये प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सिद्वार्थनाथ सिंह ने बताया कि सरकार प्रदेश में जेनरिक दवाओं को बढ़ावा देने के लिए गंभीर है। सरकार ने राज्य में प्रथम चरण में 1000 सरकारी अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर जन औषधि भण्डार खोलने का फैसला लिया है। जिनमें से 400 से अधिक जन औषधि भण्डारों का आवंटन किया जा चुका है। इसी योजना के तहत पोस्ट आफिस और बस स्टैण्ड जैसे सार्वजनिक स्थानों पर 3000 जन औषधि स्टोर खोलने की योजना है। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया  कि भारत में अभी तक 2500 जन औषधि केन्द्र खोले जा चुके हैं। प्रदेश के अन्दर 1000 जन औषधि केन्द्र खुलने से बेरोजगार फार्मेसिस्टों को व्यापक स्तर पर रोजगार मिलेगा। साथ ही जन औषधि केन्द्र के आवंटन में फार्मासिस्टों को वरीयता भी दी जाएगी। उन्होंने बताया कि कैंसर रोगियों को पैसीटाक्सल के 100 एमजी का इंजेक्शन 3450 रुपये में मिल रहा था अब यह इंजेक्शन इन केन्द्रों पर मात्र 540 रुपये में मिलेगा। इसके अलावा एंटीबायोटिक दवाओं के मूल्य में भी काफी कमी आयेगी। एजिथ्रो माइसीन 500 एमजी की एंटीबायोटिक टेबलट जिसका बाजार भाव 178 रुपये है यह दवा औषधि केन्द्रों पर मात्र 86 रुपये में सुलभ होगी। निमुस्लाइड जिसका मूल्य 39 रुपये है यह दो रुपये पचास पैसे में आम लोगों के लिए उपलब्ध होगी। उन्होंने बताया कि शुरू की गयी वेबसाइट के माध्यम से आम जनता को जन औषधि केन्द्रों की जानकारी मिल सकेगी इसके साथ ही रियल टाइम आधार पर दवाओं की उपलब्धता और दवाओं के मूल्य की जानकारी भी प्राप्त की जा सकेगी। इस योजना का क्रियान्वयन स्टेट एजेन्सी फार का प्रीहेन्सिव हेल्थ एण्ड इंटीग्रेटेड सर्विसेज साचीज द्वारा किया जा रहा है। वहीं केन्द्रीय रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री  मनसुख एल मण्डाविया ने बताया कि जेनरिक दवाओं के माध्यम से दवाओं के दाम कम करके देश की गरीब जनता को बीमारी की दशा में आर्थिक संकट से बचाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की यह महत्वाकांक्षी परियोजना है। इसको सफल बनाने के लिए केन्द्र और राज्य सरकार द्वारा मिशन मोड के रूप में काम किया जा रहा है और इस दिशा में साझा रूप से निरन्तर प्रयास जारी है। उन्होंने आश्वस्त किया कि प्रदेश में सस्ती दरों पर एक्सपोर्ट क्वालिटी युक्त दवाओं को लोकप्रिय बनाया जाएगा। इसके साथ ही योजना को सफ ल बनाने के लिए सरकारी तंत्र को और अधिक सुदृढ़ तथा जवाबदेह बनाया जायेगा। प्रदेश के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य राज्य मंत्री डाक्टर महेन्द्र सिंह ने बताया कि बीपीपीआई द्वारा प्रत्येक जन औषधि केन्द्र को प्रारंभ में एक लाख रुपये की निशुल्क औषधियां उपलब्ध करायी जाएगी। प्रत्येक जन औषधि केन्द्र कक्ष को आवश्यक अवस्थापना सुविधाओं से लैस किया जाएगा।

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