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समाज कल्याण अधिकारी के खिलाफ डीएम ने लिखा शासन को पत्र

मिर्जापुर। पं0 दीन दयाल उपाध्याय राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय मड़िहान और परसिया में फूड प्वाइजनिंग से बीमार हुए बच्चों की सही जानकारी न देने पर जिलाधिकारी बिमल कुमार दुबे समाज कल्याण अधिकारी प्रमोद कुमार सिंह पर खफा हैं। उन्होंने समाज कल्याण अधिकारी के खिलाफ शासन को पत्र लिख दिया। जिलाधिकारी ने बताया कि मड़िहान में छात्राओं के बीमार होने की घटना के बारे में पूछा गया तो समाज कल्याण अधिकारी ने बताया कि उनको सामान्य बुखार हुआ है वह ठीक हो जाएंगी। उपचार कराया जा रहा है। परसिया की घटना की जानकारी होने पर जब फोन मिलाया गया तो एक बार बात हुई। उस समय भी समाज कल्याण अधिकारी ने इस तरह की कोई घटना न होना बताया। यहां तक बताया कि पता करके बता रहा हूं। लेकिन समाज कल्याण अधिकारी ने देाबारा फोन नहीं मिया। अलबत्ता जब मैने फोन मिलाया तो फोन बंद बताने लगा। समाज कल्याण अधिकारी ने शनिवार तक अपने से घटना के बारे में कुछ भी जानकारी नहीं दी। जिलाधिकारी ने बताया कि रात में ही उन्होंने डाक्टर और आश्रम पद्धति विद्यालय के लोगों से बात करके वहां पहुंच गया था।

 

छात्र-छात्राओं के खाने पर खर्च होते हैं ढाई करोड़

जिले के दोनों पं0 दीन दयाल उपाध्याय राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय मड़िहान और परसिया में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं के खान पर हर साल ढाई करोड़ रुपये खर्च किया जा रहा है। यह धनराशि प्रदेश सरकार समाज कल्याण विभाग के माध्यम से खर्च कर रही है। यही नहीं खाने को छोड़ दिया जाए तो तेल, साबुन, कपड़ा, शिक्षकों के वेतन व मानदेय पर भी एक करोड़ रुपये से अधिक का खर्च हर साल आ रहा है। बावजूद इसके शिक्षा के इस मंदिर में विद्यार्थियों के लिए बेहतर व्यवस्था का न होने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं। समाज कल्याण विभाग के रिकार्ड पर गौर करें तो मड़िहान आश्रम पद्धति बालिका विद्यालय में मौजूदा समय में 430 छात्रएं एक से इंटर तक की कक्षाओं में पढाई कर रही हैं। इसी तरह विन्ध्याचल इलाके के परसिया में खुले पं0 दीन दयाल उपाध्याय राजकीय आश्रम पद्धति बालक विद्यालय में कक्षा एक से बारहवीं तक में 480 छात्र दाखिला लिए हैं। इस तरह से दोनों विद्यालयों में पढ़ाई करने वाले छात्र-छात्राओं की संख्या 910 है। शासन के मानक के अनुसार प्रत्येक बच्चे के खाने पर प्रतिदिन 75 रुपये का खर्च निर्धारित है। इसमें तीन वक्त का नाश्ता, दो वक्त भोजन, दूध, फल, व मिठाई शामिल है। इस तरह से दोंनों विद्यालयों के इन बच्चों के खाने पर प्रति दिन 68 हजार 950 रुपये का खर्च है। यही धनराशि वर्ष में दो करोड़ 45 लाख 70 हजार रुपये के करीब हुई। यह तो पैसा सिर्फ बच्चों के खाने की व्यवस्था पर खर्च हो रहा है। छात्र-छात्राओं की ड्रेस और साबुन, तेल, शीशा, कंघी, जूता, मोचा, पालिस पर अलग से सरकार खर्च कर रही है। इसके बाद शिक्षक शिक्षिकाओं, रसोइयां सहित अन्य कर्मचारियों व मदों पर भी बड़े पैमाने पर धनराशि खर्च हो रही है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि सरकार की मंशा किस हद तक पूरी हो रही है।

 

 

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