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बलिया के भू-जल में ‘जहर’ का ‘इलाज’ करेगा यूएसए

बलिया। बलिया के भू-जल में घूल रहे आर्सेनिक जहर का प्रभाव सोहांव, दुबहर, बेलहरी, बैरिया एवं रेवती विकास खण्डों के 55 गांवों में खतरनाक रूप धारण कर लिया है, जहां के भू- जल में आर्सेनिक की निर्धारित मात्रा 55 पीपीएम से अधिक 100 से 200 पीपीएम होने की पुष्टि हो चुकी है। आर्सेनिक के प्रभाव से बलिया में अब तक अनेक लोग अपनी जान गवां चुके हैं, जबकि 100 से अधिक लोग आर्सेनिकोसिस नामक बीमारी से पीड़ित हैं। आर्सेनिक पीड़ित गावों के लोग न केवल शारीरिक एवं मानसिक कठिनाइयों का सामना कर रहे है, बल्कि सामाजिक एवं आर्थिक दृष्टि से भी अलग होते जा रहे हैं।

संयुक्त राज्य अमेरिका से आये विशेषज्ञों के एक दल द्वारा डीपी सिन्हा महिला महाविद्यालय बांसडीह में अभिनव पाठक के संयोजकत्व में कार्यशाला का आयोजन रविवार को किया गया। इसमें यूएसए से आए विशेषज्ञ जांन माइक वालेश, सुसन वालेश, पेगी मारीसन एवं रावर्ट के अलावा अमरनाथ मिश्र स्रातकोत्तर महाविद्यालय दूबेछपरा के प्राचार्य डॉ. गणेश कुमार पाठक, डॉ. राम गणेश उपाध्याय एवं डॉ. सुनीता चौधरी ने कार्यशाला में अपने विचार प्रस्तुत करते हुए छात्राओं द्वारा पूछे गये जिज्ञासा का भी समाधान किया। डॉ. पाठक ने बताया कि आर्सेनिक एक प्रकार की जहरीली रसायन है, जिसे संखिया भी कहा जाता है। बलिया में आर्सेनिक खासतौर से गंगा नदी के तटवर्ती क्षेत्रों में भू-जल में मिलता है। बाढ़ के समय हिमालय के आर्सेनिक युक्त चट्टानों से जल के साथ आने वाला मलवा मैदानी क्षेत्रों में पहुंचता है, जिसमें निहित आर्सेनिक रिस-रिस कर इस क्षेत्र के भू-जल में पहुंच कर उसे जहरीला बना देता है। आर्सेनिक भू-जल में 40 से 50 फीट की गहराई में पाया जाता है। यही कारण है कि कुंआ के जल में आर्सेनिक नहीं पाया जाता है, किंतु आज हम लोग कुंआ को भूल चुके हैं। प्रो जांन माइक वालेश ने बताया कि आर्सेनिक युक्त जल से छुटकारा दिलाने हेतु एक बड़ी परियोजना के तहत कार्य किया जा रहा है, जिसके तहत बैरिया ब्लाक के आर्सेनिक ग्रसित गांवों का सर्वेक्षण कर उन्हें चिन्हित कर जल को शुद्घ करने के लिए संयंत्र लगाया जायेगा। प्रो. माइक ने बताया कि सर्वे के लिए अभिनव पाठक के निर्देशन में डीपी सिन्हा महिला महाविद्यालय बांसडीह की  छात्राओं को सर्वे एवं जन जागरूकता हेतु इंटर्न बनाया जायेगा। वहीं, बीएचयू वाराणसी के भूगोल विभाग के शोधकर्ता अभिषेक कुमार प्रोजेक्ट के निदेशक होंगे। महाविद्यालय के प्रबन्धक अभिषेक आनन्द सिन्हा, प्राचार्य डॉ. पुष्पा सिंह एवं डॉ. हरिमोहन सिंह ने अपना विचार प्रस्तुत करते हुए आगंतुकों तथा विशेषज्ञों का आभार ज्ञापित किया।

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