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वाराणसी: फर्जी कंपनियो के नाम पर अरबों का फर्जीवाड़ा

वाराणसी। फर्जी कंपनियों के नाम पर अरबों का फर्जीवाड़ा लंबे समय से चलता रहा है। पिछले दिनों नोटबंदी के बाद कंपनियों की जांच शुरू हुई तो चौंकाने वाले मामले सामने आ रहे हैं। ऐसा ही कुछ मुस्तफाबाद (चौबेपुर) के रहने वाले राजीव कुमार के साथ हुआ। राजीव वापी (गुजराज) की एक पाइप बनाने वाली कंपनी में काम करता है। तनख्वाह के रूप में 12 हजार रुपये मिलते हैं। कच्चा घर है और पुश्तैनी जमीन तीन भाइयों का हिस्सा मिला कर दो बीघा है। हासियत एक लाख की भी नहीं लेकिन उसके नाम से बनी कंपनी का टर्नओवर 650 करोड़ का हो गया है। राजस्व असूचना इकाई (डीआरआई) से इस आशय का नोटिस मिलने के बाद राजीव के होश उड़ चुके हैं। सूत्रों की माने तो डीआरआई ने गांव जाकर पड़ताल की है और अपनी रिपोर्ट मुख्यालय को भेज दी है। राजीव ने आशंका जतायी है कि कुछ माह पहले उससे भदोही के एक व्यक्ति ने दूसरी जगह काम दिलाने के लिए बायोडाटा मांगा था। आईडी प्रूफ के साथ फोटोग्राफ भी लिये थे। उसी ने उन कागजात के बल पर नकली फर्म तैयार की और राजीव को मालिक दर्साते हुए उसके बदले खुद हस्ताक्षर कर समूचा फर्जीवाडा किया। खास यह कि नोटबंदी की अवधि में धन का लेन-देन किया गया है। बताया जाता है कि मुंबई की यूजर्स इंटरप्राइजेज नामक जिस फर्म का मालिक राजीव को दर्शाते हुए समूचा फर्जीवाड़ा हुआ है उसका कारोबार कालीन का आयात-निर्यात दर्शाया गया है। राजीव का एक भाई आभूषण व्यवसायी के यहां सात हजार रुपये पर नौकरी करता है जबकि छोटा अभी पढ़ाई कर रहा है। पिता के बैंक खाते में महज 12 सौ रुपये हैं। अचल समप्ति के नाम पर छोटा कच्चा मकान और खेत है।

 

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