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मिर्जापुर: विकास के लिए अब लड़ाई अशिक्षा और नशा के खिलाफ जरूरी- स्वामी नरेन्द्रानन्द सरस्वती

मिर्जापुर। नर सेवा ही नारायण सेवा है, अच्छे कर्म का फल अच्छा और बुरे का परिणाम भी बुरा ही होगा। जब देश में सुई भी नहीं बनती थी तब सैकड़ो वर्षो तक अंग्रेजो से चले संघर्ष के बाद आजादी मिली। आज लड़ाई का आधार अशिक्षा और नशा है जिससे सभी को मिलकर संघर्ष करने की जरूरत है। उक्त उदगार श्री काशी सुमेरू पीठाधीश्‍वर जगदगुरू शंकराचार्य स्वामी नरेन्द्रनंद सरस्वती ने मुख्य अतिथि पद से नगर के भरूहना स्थित लान में अखिल भारतीय बा्रह्मण समाज कल्याण समिति के तत्वाधान में आयोजित कम्बल वितरण समारोह में व्यक्त किया। स्वामी नरेन्द्रानंद सरस्वती ने कहा कि कुत्ता घास नहीं खाता अगर गाय घास खा रही है तो वह उसे खाने भी नहीं देता। समाज में दूषित मानसिकता के लोगों के कारण समाज और देश विरोधी ताकतें सिर उठा रही है। कश्‍मीर में सेना पर पत्थर बाजी करने वालों पर समुकदमें उठाया जा सकता है पर देष में 77 सौ किसानों पर लादा गया मुकदमा वापस लेने में राजनैतिक दल कोई पहल नहीं कर रहें है। किसान का बेटा सीमा पर लहू बहाता है तो खेत में किसान अपना पसीना बहाता है। हर उत्पाद की कीमत उसे बनाने वाला तय करता है जबकि किसान अपनी उपज का दाम नहीं तय कर सकता। उन्होंने आरक्षण की खिलाफत करते हुए कहा कि समरसता की बात करने वाले ही जातीय आधार पर आरक्षण की वकालत करते है। विश्‍व में अपनी दक्षता से मुकाम हासिल करने वाली प्रतिभाओं को अगर अपने भारत में ही सम्मान मिलने लगे तो विश्‍व की कोई ताकत भारत के बराबर नहीं खड़ा हो सकता है। विशिष्‍ट अतिथि इलाहाबार मंडल विकास निगम के पूर्व अध्यक्ष रमेश चन्द पाण्डेय ने कहा कि परहित से बड़ा कोई कार्य नहीं है। जिस प्रकार गंगा के वेग को पर्वत पहाड़ नहीं रोक सकते उसी प्रकार निष्‍काम भाव से किये जाने वाले कार्यो को काई ताकत नहीं रोक सकती। संस्था के कार्यों पर प्रकाश डालते हुए डा0 गणेश प्रसाद अवस्थी ने प्रस्तावित सामूहिक विवाह की योजना पर प्रकाश डाला। डा0 नीरज त्रिपाठी ने कहा कि जरूरतमंदों की सेवा का फल कभी भी विष्फल नहीं होता। कार्यक्रम संयोजक सूर्यकान्त नाथ तिवारी ने कहा कि बड़े भाग्य से पूर्वजों की कृपा से सेवा का भाग्य बिरलो को ही मिलता है। इंसा नही इंसान के काम आता है जिस दिन हर मानव में इंसानियत जाग जायेगा धरती पर स्वर्ग की कामना पूरी हो जायेगी। कार्यक्रम में स्वस्तिवाचन नितिन अवस्थी, पं0 संदीप दूबे ने किया। पुरूश सूक्त की वेद ध्वनि से भगवान परशुराम की पूजन अर्चन किया गया। कार्यक्रम का संचालन विष्‍णु नारायण मालवीय ने तथा आगत अतिथियों का अभिनन्दन स्वागताध्यक्ष राजपति ओझा ने किया। कार्यक्रम में कम्बल का वितरण किया गया। इस मौके पर माता प्रसाद दूबे, चुनमुन शुक्ल, लक्ष्मीकान्त पाण्डेय, चन्द्रशेखर मिश्र, नागेन्द्र दूबे, प्रो0 डा0 रमेश ओझा, डा0 एससी चतुर्वेदी, डा0 आनन्द , डा0 कैलाश पति त्रिपाठी, डा0 ध्रुवजी पाण्डेय, डा0 तारकेश्‍वर त्रिपाठी, डा0 त्रिभुवन द्विवेदी, कृष्‍णचन्द्र शुक्ल, डा0 रामलाल त्रिपाठी, शरद चन्द्र मालवीय,गोवर्धन त्रिपाठी, अश्विनी त्रिपाठी, रत्नेश दूबे, सुरेश चन्द्र पाण्डेय, राजेन्द्र प्रसाद पाण्डेय, विनय कुमार पाण्डेय एवं हर्ष त्रिपाठी आदि लोग उपस्थित थे।

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