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सामंतवादी व्यवस्था के विरोधी थे विक्रमादित्य

बलिया। सादा जीवन उच्च विचार को परिभाषित करने वाले विक्रमादित्य पाण्डेय का जन्म एक जुलाई 1935 में बेलहरी ब्लाक के बसुधरपाह गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम जगन्नाथ पाण्डेय तथा माता का नाम समरातो देवी था। ये दो भाई थे, जिनमें सबसे बड़े थे। छोटे भाई चन्द्रमा पाण्डेय शिक्षक पद से रिटायर हुए है तथा इनकी धर्मपत्नी रमा देवी हैं। एक किसान पुत्र होने के नाते और पूर्व में यह वसुधरपाह इलाका बाढ़ क्षेत्र व गरीबी के चलते इनकी शिक्षा गांव से शुरु होकर गोरखपुर विश्वविद्यालय से आनर्स की ट्रेनिंग हासिल की। बसंतपुर में अध्यापक फिर शहीद मंगल पाण्डेय इण्टर कालेज नगवा में प्राचार्य के पद को सुशोभित किया।

इनके राजनैतिक जीवन की शुरुआत सामंतों के खिलाफ शुरु हुआ। कम उम्र में राजनीति शुरु करने वाले विक्रमादित्य पाण्डेय के सामने सामन्तों का दबदबा था। जबरदस्ती दूसरे के खेतों पर कब्जा तथा उन लोगों का आतंक का वातावरण था। पाण्डेय जी ने इन्हीं सामन्तों का विरोध कर अपने संघर्ष की शुरुआत की तथा लोगों के चहेते बनें। पहली बार प्रधान बने तथा उसके बाद बेलहरी ब्लाक के ब्लाक प्रमुख पद पर लगातार तीन बार रहे। वे बलिया सदर सीट से लगातार तीन बार विधायक रहे। अपनी ईमानदारी व निष्ठा के चलते प्रदेश में कैबिनेट मंत्री तथा विधान परिषद के सदस्य भी रहे। पार्टी के प्रति निष्ठा उनकी पहचान थी। जिले के विकास के लिए श्री पाण्डेय सदैव प्रयत्नशील रहे। नगर तथा ग्रामीण इलाकों में पानी की टंकियां, सीवर योजना, शिवरामपुर घाट पर पीपा का पुल जो आज भी हजारों लोगों की रोजी रोटी से जोड़ता हैं। नौरंगा पीपा पुल, छाता बसंतपुर में हास्पिटल, शहीद मंगल पाण्डेय की मूर्ति तथा स्मारक, महर्षि भृगु जी मंदिर का जीर्णाद्धार, महिला महाविद्यालय बसरिकापुर तथा महिला महाविद्यालय नगवा में शुरु कराया। वे अंतिम सांस तक विकास की सोच रखते हुए 14 जनवरी 2009 को हमेशा के लिए हमसे दूर चले गए।

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