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जौनपुर: मौत की धार चाइनीज मांझे पर प्रशासन की रोक आखिर क्यो नहीं

जौनपुर। आसमान में तलवार से भी तेज धार वाली मौत की ‘डोर’ दिख रही है, जिसकी जद में आने वाले इस कदर जख्मी हो जाते हैं कि कई बेगुनाह मौत तक की मुंह में चले जाते हैं। इनमें अधिकांश बेजुबान पक्षी होते हैं। जी हां अब तो प्रतिबंध के बाद भी पतंग उड़ाने के लिए प्रयोग में लाए जाने वाले इन मांझों की डर से लोग छत तक पर जाने में डरने लगे हैं, क्योंकि न जाने किस ओर से उड़ती हुई यह डोर उनके गला, चेहरा को अपनी जद में ले लें और वे हादसे के शिकार हो जाए। वहीं मौजूदा समय की स्थिति को देखने के बाद यह कहना भी तनिक गलत न होगा कि प्रशासन को इस मांझे से हादसा होने का इंतजार है। शायद यही वजह है कि कोई कार्रवाई करने की जहमत ही नहीं उठा रहा है। पतंग उड़ाने के लिए लोग मजबूत और तेज धार वाले मांझे का इस्तेमाल कर रहे हैं। इनमें तेज धार वाले मांझे पशु, पक्षी व मानव के लिए खतरनाक साबित हो रहा है। पर्यावरण को भी क्षति पहुंचाने वाले इन मांझों से कई बार पक्षियों और मानव की मौत की खबरें आईं। पिछले ही वर्ष इस मांझे ने कई लोगों को जहां जख्मी कर दिया था, वहीं साइकिल सवार उमरपुर निवासी उत्तम दुबे की जान ले लिया था। हालांकि इसके पहले ही इस तरह के हादसों की बढ़ी संख्या को देखते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यून ने नाइलान या किसी भी सिथेटिक मटेरियल से बने मांझे जो नष्ट नही होने लायक हो के निर्माण, आयात, बिक्री और इस्तेमाल पर पूर्ण से प्रतिबंध लगा दिया था, फिर भी इसकी बिक्री जिले में धड़ल्ले से की जा रही है। केमिकल और अन्य धातु के मिश्रण कर विशेष तौर पर तैयार किए जाने वाले इस प्रकार के मांझे बड़ी आसानी से जिले की सभी बाजार में पतंगबाजी के शौ़कीनों को मिल जाता है। इस समय तो ठंड में थोड़ी बहुत निकल रही धूप लेने के लिए छत पर जाना भी लोग खतरे से खाली नहीं मानते, क्योंकि इस प्रकार के मांझे के सहारे पतंगबाजी करने वालों की संख्या में जबर्दस्त वृद्धि हुई है। कार्रवाई न होने और बिक्री बढ़ने से कारोबारियों का भी हौसला और बुलंद है। वे चंद रुपये की लालच में इस तरह के प्रतिबंधित मांझे की बिक्री कर रहे हैं। वहीं इन दिनों खासकर देखा जा रहा है कि यदि अधिकारी या पुलिस इन दुकानों के समीप से गुजरती भी है तो मानों आंखें बंद कर लेती है, जो जिम्मेदारों को भी कटघरे में खड़ा करती है, क्योंकि इसके रोकथाम के लिए उनके स्तर से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है, जिसे प्रतिबंधित मांझों की बिक्री व खरीद करने वालों का मनोबल बढ़ गया है। जिसे देखने के बाद अब तो ऐसा लगता है मानों प्रशासन इन प्रतिबंधित मांझों से हादसे होने का इंतजार कर रहा हैं, जिसके बाद वे इसके खिलाफ मुहिम छेड़े। अखबारो व पोर्टल पर प्रकाशित खबरों को एडीएम आरपी मिश्रा ने गंभीरता से लिया था। उन्होंने बैठक में सभी उप जिलाधिकारियों को निर्देशित भी किया था कि इस प्रकार के मांझे की बिक्री करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें, लेकिन किसी एसडीएम ने एक भी पतंग की दुकान पर बिकने वाले इस प्रकार के प्रतिबंधित मांझे की पड़ताल तक करना उचित नहीं समझा। मछलीशहर एसडीएम विमल कुमार दुबे ने एक दिन पहले यहां तक दावा किया कि उनके नगर में चाइनीज किस्म के मांझे की बिक्री ही नहीं हो रही है, जबकि सच्चाई यह है कि वे किसी दुकान पर गए ही नहीं, हालांकि वे आगे यह जरूर कह रहे थे कि यदि कोई दुकानदार चाइनीज किस्म के मांझे को बेचते पकड़ा जाता है तो उस पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अब सवाल उठता है कि जब छापेमारी ही नहीं करेंगे तो साहब कैसे आपको पता कि कोई प्रतिबंधित मांझा बेच रहा है। वहीं 10 जनवरी को सीओ सिटी नृपेंद्र कुमार ने दो दुकानों पर छापेमारी कर कोरमपूर्ति कर लिया, जबकि अन्य किसी जिम्मेदार ने इस ओर देखना भी अभी तक उचित नहीं समझा। मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के कारण व्यस्तता थी। इस वजह से किसी दुकान पर अधिकारी नहीं गए होंगे, लेकिन किसी को भी प्रतिबंधित मांझे की बिक्री करने का अधिकार नहीं दिया गया है। इसके खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी। इस दौरान कोई पकड़ा गया तो संबंधित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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