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लखनऊ: ओपी सिंह ने डीजीपी पद पर किया कार्यभार ग्रहण, कहा महिलाओं की सुरक्षा की प्राथमिकता

लखनऊ। ओपी सिंह ने मंगलवार को यूपी के नए डीजीपी का कार्यभार संभाल लिया है। नामित होने के 24वें दिन 1983 बैच के आईपीएस ओपी सिंह ने DGP का पद संभाला है। कार्यभार ग्रहण करने के बाद उन्‍होने कहा कि महिलाओं सहित सबकी सुरक्षा का कार्य प्राथमिकता पर रहेगा। पुलिस में जनता का विश्‍वास बढाने के लिए हर संभव कार्य किये जायेगे। मंगलवार उनकी नियुक्ति का आदेश जारी हुआ था। वह 10 महीने पुरानी योगी सरकार के तीसरे डीजीपी हैं। इससे पहले जावीद अहमद और सुलखान सिंह यूपी के डीजीपी थे। बता दें कि श्री सिंह केन्द्र से प्रतिनियुक्ति बीच में छोड़कर 4 साल बाद यूपी लौट रहे हैं। 31 दिसंबर, 2017 को सुलखान सिंह के 3 माह के सेवा विस्तार की अवधि पूरी हो गई थी। तब गृह विभाग के प्रवक्ता ने कहा कि 1983 बैच के ओपी सिंह को डीजीपी बनाने के लिए केन्द्र को प्रस्ताव भेजा गया है। इससे पहले ओपी सिंह औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के महानिदेशक पद पर थे। ओपी सिंह बिहार के गया जिले के मीरा बिगहा गांव के रहने वाले हैं। वह 1983 बैंच के यूपी कैडर के आईपीएस ऑफिसर हैं। वह केंद्र और यूपी में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों को निभा चुके हैं।
-ओपी सिंह को 1993 में बहादुरी के लिए इंडियन पुलिस मेडल, 1999 में सराहनीय सेवाओं के लिए राष्ट्रपति पुलिस मेडल और 2005 में विशिष्ट सेवाओं के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक मिल चुका है। कड़क मिजाज के आईपीएस ओपी सिंह अपनी पोस्टिंग के दौरान खासा चर्चा में रहे है। महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों के साथ सीआईएसएफ को दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन, अति महत्वपूर्ण व्यक्ति (VIP) सुरक्षा, आपदा प्रबंधन तथा हती में यूएन की सशस्त्र व पुलिस यूनिट (FPU) स्थापना की सुरक्षा करने जैसे कार्य भी हाल ही में को सौंपे गए थे। 1983 बैच के आईपीएस ओमप्रकाश सिंह मूल रूप से गया, बिहार के निवासी हैं। वह अल्मोड़ा, खीरी, बुलंदशहर, लखनऊ, इलाहाबाद, मुरादाबाद में बतौर एसएसपी काम कर चुके हैं। ओपी सिंह 3 बार लखनऊ के एसएसपी रह चुके हैं। आजमगढ़ और मुरादाबाद के डीआईजी व मेरठ जोन के आईजी भी रह चुके हैं। इनके पास सीआरपीएफ का लंबा अनुभव है। दूसरी बार, 2 जून 1995 को अचानक उनका तबादला इलाहाबाद से लखनऊ किया गया, लेकिन कुछ ही घंटे बाद हुए गेस्ट हाउस कांड के कारण उन्हें दो दिन में ही सस्पेंड कर दिया गया। तीसरी बार वह भाजपा की कल्‍याण सिंह की सरकार में लखनऊ के एसएसपी बने। तीन माह नौ दिन तक इस पद पर रहने के बाद उन्हें भ्रष्टाचार निवारण संगठन भेज दिया गया। नए डीजीपी के सामने सबसे बड़ी चुनौती यूपी में कानून व्यवस्था को लेकर है। प्रदेश की कानून व्यवस्था पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। राजधानी लखनऊ में 4 दिनों के अंदर कई बड़ी डकैती हो चुकी हैं, जबकि दो लोगों की हत्या भी की गई है। आतंकवाद, संगठित अपराधों से निपटने की रणनीति को जमीन पर उतारने की चुनौती होगी।

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