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मऊ: गिद्धों के समूह के आगमन को लेकर रतनपुरा वासियों में कौतुहल

एचएन आज़मी

मऊ/रतनपुरा। स्थानीय चमड़ा गोदाम के जर्जर छत पर तकरीबन 25 वर्ष के बाद गिद्धों के एक समूह का दर्शन हुआ। विलुप्त हो चुके इस प्राणी को  देखने के लिए कस्बाई नागरिकों की भारी भीड़ जमा हो गई। गिद्धों के आगमन को लेकर के कस्बा के नागरिकों में आज भारी कोतूहल देखा गया। इसका कारण यह रहा कि दो दशक से मृत जानवरों का निवाला बनाने वाला यह प्राणी एकदम से गायब हो चुके थे। पहले कस्बा में एक छत पर एक गिद्ध  के आगमन की सूचना मिली, फिर इसके बाद दो का समूह चमड़ा गोदाम की छत पर पहुंचा तो यह बात कस्बा में जंगल की आग की तरह फैल गई। फिर देखते देखते सैकड़ों लोग  चमड़ा गोदाम पहुंच गए, और इस अजूबे नजारे को देखने के लिए टूट पड़े! हालांकि गिद्धों के बारे में यह मशहूर है कि यह जिस छत पर बैठ जाते हैं उस मकान को खंडहर में तब्दील होने की आशंका बनी रहती है। परंतु इनके पलायन को लेकर के नागरिक और सरकार दोनों चिंतित थे आलम यह था कि मृत मवेशियों के मांस भक्षण का कार्य कुत्ते और सियार सरीखे जानवर करते थे। परंतु मलवा जहां का तहां पड़ा रह जाता था। यहां तक की सड़कों पर सियार कुत्ते और दूसरे पशुओं के दुर्घटना में मारे जाने पर मलवा वहीं का वहीं पड़ा रह जाता था कोई उठाने वाला तक नहीं था! जिसकी वजह से चौतरफा प्रदूषण आम नागरिकों को झेलने पड़ते थे। जबकि गिद्ध  पर्यावरण के दृष्टिकोण से काफी अनुकूल पक्षी है, लेकिन इनके पलायन की वजह से लोगों को काफी दुश्वारियां झेलनी पड़ रही थी। गिद्धों के बारे में यह मशहूर है कि यह एक सीध में 1000 किलोमीटर की दूरी तय कर लेते हैं! तथा ऊंची उड़ान हवाई जहाज से भी अधिक करते हैं, तथा यह  मृत  जानवरों  की सूचना  अपने प्राकृतिक बनावट  की वजह से भाप लेते हैं, और वहां  तीव्र गति से झुंड के साथ पहुंच जाते हैं फिलहाल कस्बे में उनके आगमन का लोगों ने भरपूर स्वागत किया है। पर्यावरण के रक्षक के रूप में पहचानी जाने वाली गिद्ध प्रजाति संरक्षण के अभाव में पूरे देश से समाप्त होने की कगार पर खड़ी है। एक अनुमान के मुताबिक 40 साल पहले जहां देश में लगभग चार करोड़ गिद्ध थे तो अब चार लाख भी नहीं बचे हैं। गिद्धों की संख्या में आयी इस तेज़ गिरावट के बाद सरकार की नींद टूटी है और वह इनकी संख्या बढ़ाने के विभिन्न उपायों पर काम कर रही है।

संरक्षण के प्रयास

इस साल के पर्यावरण दिवस की थीम “गो वाइल्ड फॉर लाइफ” यानी जिंदगी के लिए जंगलों की ओर चलें, को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने गिद्धों को जीवन देने की कोशिश की। सरकार ने इस अवसर पर हरियाणा के पिंजौर में गिद्ध पुनपर्रिचय कार्यक्रम को शुरू कर पर्यावरण दिवस मनाया। पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने गिद्धों को स्वच्छ भारत अभियान के सबसे बड़ा स्वयंसेवक बताते हुए इनके संरक्षण के लिए सभी ज़रूरी कदम उठाने का भरोसा दिलाया है। उन्होंने कहा कि उनका मंत्रालय आगामी सालों में गिद्धों की संख्या बढ़ाने की दिशा में काम करेगा।

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