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शहरों की छतों पर पवन ऊर्जा से बिजली उत्पादन का नया रास्ता, एमएमएमयूटी के शोधकर्ताओं को मिला भारतीय डिज़ाइन पेटेंट

गोरखपुर। तेजी से बढ़ते शहरीकरण और स्वच्छ ऊर्जा की बढ़ती आवश्यकता के बीच मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी), गोरखपुर के शोधकर्ताओं ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। विश्वविद्यालय के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के डॉ. वीरेन्द्र कुमार एवं डॉ. पल्लव गुप्ता द्वारा विकसित ‘माइक्रो विंड टरबाइन फॉर अर्बन रूफटॉप्स’ के नवीन डिज़ाइन को डिज़ाइन पेटेंट प्राप्त हुआ है। यह पंजीकरण माइक्रो विंड टरबाइन की विशिष्ट संरचना और आकार की मौलिकता को मान्यता देता है। यह केवल एक नया विंड टरबाइन नहीं है, बल्कि ऐसा औद्योगिक डिज़ाइन है जिसे विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों की इमारतों की छतों पर स्थापित करने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। इसकी संरचना कम स्थान में स्थापना, बेहतर उपयोगिता और आधुनिक शहरी भवनों के अनुरूप डिज़ाइन को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।वर्तमान में अधिकांश विंड टरबाइन्स बड़े आकार के होते हैं और उन्हें खुले मैदानों, समुद्री तटों या पहाड़ी क्षेत्रों में स्थापित किया जाता है। घनी आबादी वाले शहरों में स्थान की कमी, ऊँची इमारतों और सीमित अवसंरचना के कारण उनका उपयोग व्यावहारिक नहीं होता। ऐसे में यह माइक्रो विंड टरबाइन शहरी क्षेत्रों के लिए एक नया विकल्प प्रस्तुत करता है। इसका उद्देश्य शहरों की छतों पर उपलब्ध पवन ऊर्जा का उपयोग कर स्थानीय स्तर पर बिजली उत्पादन को बढ़ावा देना है, जिससे पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम हो सके और डिस्ट्रिब्यूटेड रिन्यूएबल एनर्जी सिस्टम्स को बढ़ावा मिले।इस नवाचार की सबसे बड़ी विशेषता इसका कॉम्पैक्ट आकार है, जिसे विशेष रूप से शहरी इमारतों की छतों के लिए विकसित किया गया है। पारंपरिक बड़े विंड टरबाइन्स की तुलना में यह कॉम्पैक्ट, स्पेस-एफिशिएंट और शहरी भवनों के अनुरूप है। यह माइक्रो विंड टरबाइन भविष्य में आवासीय भवनों, अपार्टमेंट्स, विद्यालयों, महाविद्यालयों, अस्पतालों, सरकारी कार्यालयों, वाणिज्यिक परिसरों तथा अन्य संस्थागत भवनों की छतों पर उपयोगी सिद्ध हो सकता है। यदि इसका व्यावसायिक विकास होता है, तो यह शहरी क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन का एक प्रभावी माध्यम बन सकता है।इस उपलब्धि पर शोधकर्ताओं ने कहा कि यह डिज़ाइन पेटेंट आधुनिक शहरी अवसंरचना के अनुरूप रिन्यूएबल एनर्जी टेक्नोलॉजीज़ के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के नवाचार डिस्ट्रिब्यूटेड रिन्यूएबल एनर्जी सिस्टम्स के व्यापक उपयोग को गति देंगे तथा भारत के स्वच्छ एवं सतत ऊर्जा लक्ष्यों की प्राप्ति में महत्वपूर्ण योगदान देंगे। एमएमएमयूटी की कुलपति प्रो. अनुपमा कौशिक शर्मा ने शोधकर्ताओं को बधाई देते हुए कहा, “डॉ. वीरेन्द्र कुमार एवं डॉ. पल्लव गुप्ता ने अपने अभिनव अनुसंधान से विश्वविद्यालय का गौरव बढ़ाया है। यह उपलब्धि एमएमएमयूटी की अनुसंधान उत्कृष्टता, नवाचार और बौद्धिक संपदा सृजन के प्रति प्रतिबद्धता का सशक्त प्रमाण है। समाज की वर्तमान आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर विकसित ऐसी स्वदेशी रिन्यूएबल एनर्जी टेक्नोलॉजीज़ आत्मनिर्भर भारत और सतत विकास की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। मुझे विश्वास है कि यह उपलब्धि हमारे शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों को समाजोपयोगी अनुसंधान एवं नवाचार के लिए नई प्रेरणा देगी।”

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