लखनऊ। उत्तर प्रदेश की महामहिम राज्यपाल एवं लखनऊ विश्वविद्यालय की कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल के निर्देशों के अनुपालन में लखनऊ विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह माह के अंतर्गत समाज कार्य विभाग स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय शोध पीठ के संयोजन में विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए ग्रामों भैंसामऊ, गाजीपुर, डिंगुरपुर, सोनवा, एवं मिश्रीपुर के विद्यालयों में विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। दीक्षांत समारोह-2026 के उपलक्ष्य में आयोजित इन प्रतियोगिताओं के अंतर्गत चित्रकला, भाषण, कहानी कथन एवं काव्य प्रतियोगिताएँ दो श्रेणियों में संपन्न कराई गईं। प्रतियोगिताओं का उद्देश्य ग्रामीण विद्यार्थियों में सृजनात्मक अभिव्यक्ति, भाषायी दक्षता, आत्मविश्वास, तार्किक चिंतन तथा व्यक्तित्व विकास को प्रोत्साहित करना है। विद्यार्थियों ने “मेरी माँ” विषय पर अपनी प्रतिभा का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। इसी क्रम में गोद लिए गए ग्रामों के विद्यालयों में ग्रामीण खेलकूद प्रतियोगिताओं का भी निरंतर आयोजन किया गया। इन खेल गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों में शारीरिक क्षमता, अनुशासन, नेतृत्व, टीम भावना तथा स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना का विकास किया जा रहा है। खेलकूद प्रतियोगिताओं में बच्चों की उत्साहपूर्ण सहभागिता ग्रामीण क्षेत्रों में खेल संस्कृति को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। लखनऊ विश्वविद्यालय के आगामी दीक्षांत समारोह-2026 में इन प्रतियोगिताओं में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को महामहिम राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल द्वारा सम्मानित एवं पुरस्कृत किया जाएगा। इसके अतिरिक्त ग्रामीण खेलकूद प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग करने वाले चयनित बच्चों को दीक्षांत समारोह में अतिथि के रूप में सम्मिलित होने का अवसर प्रदान किया जाएगा। पंडित दीनदयाल उपाध्याय शोध पीठ के निदेशक प्रो. राकेश द्विवेदी ने बताया कि पीठ द्वारा संचालित यह अभियान एकात्म मानव दर्शन एवं अंत्योदय की भावना पर आधारित है, जिसके अंतर्गत समाज के अंतिम पायदान पर स्थित बच्चों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अवसर और प्रोत्साहन पहुँचाने का सतत प्रयास किया जा रहा है। शोध पीठ विगत वर्षों से गोद लिए गए ग्रामों में शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, पोषण, व्यक्तित्व विकास, खेलकूद एवं सामाजिक जागरूकता से संबंधित विविध कार्यक्रमों का संचालन कर रही है। राजभवन विगत वर्षों से ऐसी पहल कर रहा है जिससे ग्रामीण विद्यार्थियों को विश्विद्यालय के वातावरण से परिचित होने का अवसर मिले और वे आगे हमारे छात्र भी बनकर अपना भविष्य उज्जवल करें। विद्यालय के शिक्षकों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि “यह पहल ग्रामीण विद्यार्थियों के लिए केवल पुरस्कार प्राप्त करने का अवसर नहीं है, बल्कि उन्हें विश्वविद्यालय के शैक्षणिक वातावरण से परिचित कराने, उच्च शिक्षा के प्रति प्रेरित करने तथा उनके भीतर आत्मविश्वास और नई आकांक्षाओं का संचार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। हम लोगों का मानना है कि ऐसे अनुभव बच्चों में उच्च शिक्षा के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करेंगे तथा उन्हें अपने जीवन में बड़े लक्ष्य निर्धारित करने के लिए प्रेरित करेंगे।” इस प्रकार की गतिविधियाँ ग्रामीण विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, शैक्षिक उन्नयन तथा विकसित भारत के निर्माण में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में मील का पत्थर सिद्ध होंगी। दीक्षांत समारोह में इन बाल प्रतिभाओं का सम्मान विश्वविद्यालय और ग्रामीण समाज के बीच सहभागिता एवं सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को और अधिक सुदृढ़ करेगा
Purvanchal News जोड़े आपको पूर्वांचल से….