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बीएचयू के कुलपति ने किया संस्कृतविद्या शोधपत्रिका का 35वाँ अंक का हुआ विमोचन

वाराणसी।। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय केन्द्रीय कार्यालय में मंगलवार को कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने “संस्कृतविद्या” शोधपत्रिका के 35वें अंक का विमोचन किया। इस शोधपत्रिका का प्रकाशन संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय द्वारा वर्ष 1981 से किया जा रहा है। इस अवसर पर संस्कृतविद्या शोधपत्रिका के प्रधान सम्पादक एवं संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के संकाय प्रमुख प्रो. राजाराम शुक्ल, सम्पादक प्रो. माधव जनार्दन रटाटे, सहसम्पादक प्रो. सुनील कात्यायन, प्रो. शैलेश कुमार तिवारी, डॉ. प्रियव्रत मिश्र तथा सम्पादक मण्डल के सदस्य प्रो. शीतला प्रसाद पाण्डेय, प्रो. प्रद्युम्न शाह सिंह, प्रो. शत्रुघ्न त्रिपाठी, प्रो. रजनीश पाण्डेय, प्रो. रमाकान्त पाण्डेय एवं प्रकाशन अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्र उपस्थित रहे। इस अवसर पर प्रो. सुनील कात्यायन ने वैदिक मंगलाचरण एवं प्रो. शैलेश ने पौराणिक मंगलाचरण प्रस्तुत किया। अपने उद्बोधन में कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि यह अत्यंत प्रसन्नता का विषय है कि लगभग चार दशकों से अधिक समय से संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय द्वारा प्रकाशित इस शोधपत्रिका के नवीन अंक के विमोचन का अवसर मुझे प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि शोधपत्रिका के नियमित एवं गुणवत्तापूर्ण प्रकाशन के लिए विश्वविद्यालय हर संभव सहयोग प्रदान करेगा। कुलपति जी ने कहा कि वर्तमान समय में संस्कृत के प्रति लोगों की रुचि निरंतर बढ़ रही है और जो लोग प्रत्यक्ष रूप से संस्कृत शोध से जुड़े नहीं हैं, वे भी इस क्षेत्र से जुड़ने के लिए उत्सुक हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि संकाय द्वारा किए जा रहे शोध एवं शैक्षणिक कार्यों को विश्वविद्यालय स्तर पर अधिक प्रभावी ढंग से प्रदर्शित करने की दिशा में प्रयास किए जाने चाहिए।यह संस्कृतविद्या शोधपत्रिका विश्वविद्यालय अनुदान आयोग में सूचीबद्ध होने के साथ ही समकक्ष समीक्षित एवं मूल्यांकिता है। इस शोधपत्रिका के अन्तर्गत संस्कृत-हिन्दी-अंग्रेजी भाषाओं में रचित लेखों का प्रकाशन किया जाता है। वर्ष 1981 से इस पत्रिका का सम्पादन संकाय द्वारा किया जा रहा है। शोधपत्रिका के विमोचन के अवसर पर कुलपति जी ने प्रधान सम्पादक प्रो. राजाराम शुक्ल एवं सम्पादक मण्डल के सभी सदस्यों को बधाई देते हुए संकाय में इसी प्रकार के शैक्षणिक एवं अनुसंधानपरक कार्यों को निरंतर आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया।

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