वाराणसी। करीब पांच दशक पहले, 25 जुलाई 1978 को इंग्लैंड में जब दुनिया की पहली आईवीएफ शिशु लुईस ब्राउन का जन्म हुआ, तब शायद किसी ने नहीं सोचा था कि यह उपलब्धि एक दिन करोड़ों परिवारों की जिंदगी बदल देगी। भारत ने भी 1986 में डॉ. इंदिरा हिंदुजा के प्रयासों से इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम रखा। आज विश्वभर में एक करोड़ से अधिक बच्चे आईवीएफ तकनीक की मदद से जन्म ले चुके हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, आज लगभग हर छह में से एक दंपत्ति जीवन के किसी न किसी समय बांझपन की समस्या का सामना करता है। इसके पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं: देर से विवाह और बढ़ती मातृत्व आयु। तनावपूर्ण जीवनशैली और मोटापा। मधुमेह, पीसीओएस (PCOS) और थायरॉयड रोग। धूम्रपान, शराब और प्रदूषण। पुरुषों में शुक्राणुओं की गुणवत्ता में कमी (यह ध्यान रखना जरूरी है कि लगभग आधे मामलों में पुरुष संबंधी कारण जिम्मेदार होते हैं)। आज का आईवीएफ पहले की तुलना में कहीं अधिक सुरक्षित, सटीक और आरामदायक हो चुका है। तकनीकी सुधार: नई पीढ़ी की दवाओं, अत्यंत पतली सुइयों और आधुनिक तकनीकों ने उपचार के दौरान होने वाली असुविधा को काफी कम कर दिया है। व्यक्तिगत उपचार: आईवीएफ अब ‘एक जैसा उपचार’ नहीं रह गया है। प्रत्येक दंपत्ति की उम्र, हार्मोन स्तर, ओवरी की क्षमता और चिकित्सा इतिहास को ध्यान में रखते हुए व्यक्तिगत उपचार योजना बनाई जाती है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI): एआई अब भ्रूणों के विकास का विश्लेषण कर बेहतर भ्रूण चयन, शुक्राणु मूल्यांकन और उपचार की योजना बनाने में विशेषज्ञों की सहायता कर रहा है। सफलता दर: बेहतर लैब, टाइम-लैप्स मॉनिटरिंग, विट्रिफिकेशन और आधुनिक प्रोटोकॉल के कारण सफलता दर में निरंतर सुधार हुआ है, साथ ही ओवेरियन हाइपरस्टिमुलेशन सिंड्रोम जैसी जटिलताओं का जोखिम भी काफी कम हुआ है। सबसे बड़ी चुनौती तकनीक नहीं, बल्कि समाज की सोच है। बांझपन कोई अभिशाप या सामाजिक कलंक नहीं, बल्कि एक चिकित्सकीय स्थिति है। तकनीकी प्रगति और केंद्रों की उपलब्धता के कारण यह उपचार पहले की तुलना में अधिक सुलभ और किफायती होता जा रहा है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उम्र के साथ प्रजनन क्षमता स्वाभाविक रूप से कम होती जाती है, इसलिए उपचार में अनावश्यक देरी कई बार सबसे महंगी साबित होती है। विश्व आईवीएफ दिवस हमें विश्वास देता है कि सही समय पर जांच, सही सलाह और आधुनिक विज्ञान की मदद से माता-पिता बनने का सपना साकार हो सकता है।
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