गाजीपुर। नंदगंज बाजार में बंदरों के बढ़ते आतंक से परेशान एक परिवार ने उनसे बचाव के लिए अपनाया गया अनोखा उपाय पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है। बाजार निवासी फहीम अख्तर ने अपने मकान की छत की रेलिंग पर लंगूर का पोस्टर चिपका दिया है। उनका दावा है कि पोस्टर लगाने के बाद बंदरों के झुंड उनके घर की ओर आने के बजाय दूर से ही लौट जा रहे हैं। इस प्रयोग की चर्चा अब नंदगंज बाजार के साथ-साथ आसपास के गांवों में भी होने लगी है। फहीम अख्तर ने बताया कि पिछले करीब दो वर्षों से बंदरों का आतंक उनके परिवार के लिए बड़ी समस्या बना हुआ था। बंदर रोजाना उनके मकान की छत पर आ जाते थे और कई बार घर के अंदर भी घुस जाते थे। वे फ्रिज खोलने की कोशिश करते, रसोई में रखे फल, सब्जियां और अन्य खाद्य सामग्री उठा ले जाते थे। कई बार बंदरों ने घरेलू सामान को भी नुकसान पहुंचाया, जिससे परिवार लगातार भय और असुरक्षा के माहौल में रह रहा था। उन्होंने बताया कि बंदरों की इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए वन विभाग से कई बार शिकायत की गई, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने इंटरनेट पर बंदरों से बचाव के उपाय खोजे और वहां से प्रेरणा लेकर लंगूर का पोस्टर मंगवाकर अपनी छत की रेलिंग पर लगा दिया। उनका कहना है कि पोस्टर लगाने के बाद बंदरों की गतिविधियों में स्पष्ट कमी आई है और अब वे घर के आसपास कम दिखाई देते हैं। कई बार बंदरों का झुंड छत की ओर आता है, लेकिन लंगूर का पोस्टर देखते ही वापस लौट जाता है। फहीम अख्तर का यह अनोखा प्रयोग अब स्थानीय लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बन गया है। बड़ी संख्या में लोग उनके घर पहुंचकर पोस्टर देख रहे हैं और इस उपाय के बारे में जानकारी ले रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि यदि इससे बंदरों के आतंक से राहत मिलती है तो वे भी अपने घरों पर ऐसा पोस्टर लगाने पर विचार करेंगे। हालांकि क्षेत्र के लोगों का मानना है कि यह उपाय केवल अस्थायी राहत दे सकता है। उनका कहना है कि नंदगंज बाजार और आसपास के इलाकों में बंदरों की संख्या लगातार बढ़ रही है। बंदर घरों, दुकानों और सार्वजनिक स्थानों पर उत्पात मचाते हैं, जिससे लोगों को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ भय का सामना भी करना पड़ता है। स्थानीय नागरिकों ने वन विभाग से मांग की है कि क्षेत्र में बंदरों के बढ़ते आतंक से स्थायी समाधान के लिए शीघ्र ठोस और प्रभावी कदम उठाए जाएं। लोगों का कहना है कि बंदरों को सुरक्षित तरीके से पकड़कर वन क्षेत्रों में छोड़ा जाए, ताकि बाजार और रिहायशी इलाकों में रहने वाले लोगों को इस समस्या से स्थायी राहत मिल सके।
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