शिवकुमार
गाजीपुर। विधानसभा चुनाव 2027 जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, राजनीतिक दलों में प्रत्याशी के चयन के लिए सरगर्मी बढ़ गयी है। सदर विधानसभा में बसपा ने बिंद प्रत्याशी का नाम आगे कर भाजपा और सपा के खेमे में खलबली मचा दी है। सदर विधानसभा में लगभग चार लाख मतदाता हैं जिसमे सबसे ज्यादा संख्या बिंद, मल्लाह, केवट की है। इसके बाद दलित और यादव आते हैं जो किसी भी समीकरण को बना-बिगाड़ सकते हैं। 2019 के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी डा. संगीता बलवंत ने सपा के प्रत्याशी राजेश कुशवाहा को 29 हजार मतों से पराजित किया था। योगी सरकार के कार्यकाल के अंतिम साल में इन्हे राज्यमंत्री बनाया गया। 2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी जैकिशन साहू ने पूर्व मंत्री डा. संगीता बलवंत को करीब 1600 मतों से पराजित किया था। भाजपा सपा और बसपा लगातार बिंद मतों को चुनाव में प्राप्त करने के लिए प्रयासरत रहती हैं इसके लिए राजनीतिक नेता सभी हथकंडे अपनाते हैं। कुछ दिन पहले हुए एक लाख इनामिया कमलेश बिंद के एनकाउंटर में गाजीपुर लोकसभा के सांसद अफजाल अंसारी ने कमलेश बिंद के घर जाकर शोक संवेदना व्यक्त किया और एनकाउंटर की जांच कराने का मांग किया। सांसद के इस कदम से इस समाज में सपा के प्रति हमदर्दी बढ़ी है। इसी को देखते हुए सपा का एक खेमा सदर विधानसभा में बिंद प्रत्याशी के लिए चट्टी-चौराहों पर वकालत कर रहा है। भारतीय जनता पार्टी बिंद, केवट, मल्लाह को अपना परम्पराग वोट मानती है जिसको बचाने के लिए एड़ी से चोटी का जोर लगा रही है। राज्यसभा सांसद डा. संगीता बलवंत भी लगातार अपने समाज में जनसंपर्क कर एकजुटता पर जोर दे रही हैं। ऐन वक्त पर बसपा ने डा. पारस बिंद का नाम उछाल कर गाजीपुर के सियासत में सरगर्मी पैदा कर दी है। अब देखना है कि ऊंट किस करवट बैठता है।
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