प्रयागराज। गाजीपुर से समाजवादी पार्टी के सांसद अफजाल अंसारी को शस्त्र लाइसेंस की पत्रावली गायब होने और लाइसेंस के दुरुपयोग से जुड़े तीन मामलों में इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है. हाईकोर्ट ने तीनों मामलों में उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है. हालांकि, अदालत ने अभी एफआईआर रद्द नहीं की है. इस मामले में अगली सुनवाई 3 हफ्ते बाद होगी. अफजाल अंसारी ने गाजीपुर के कोतवाली थाने में दर्ज तीनों एफआईआर को रद्द करने और उत्पीड़नात्मक कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। दरअसल, सोमवार को जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और जस्टिस जेके उपाध्याय की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई की. हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को दो हफ्ते में काउंटर एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया है. वहीं, याची के वकील को इसके एक सप्ताह बाद रिज्वाइंडर दाखिल करने को कहा गया है. अदालत ने मामले को 3 सप्ताह बाद दोबारा सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है. अगली सुनवाई में एफआईआर रद्द करने की मांग पर बहस होगी. अफजाल अंसारी के खिलाफ गाजीपुर कोतवाली थाने में 3 अलग-अलग एफआईआर दर्ज हैं. ये मुकदमा अपराध संख्या 535, 551 और 554 हैं. तीनों मुकदमे कोतवाली गाजीपुर के एसएचओ प्रमोद कुमार सिंह की ओर से दर्ज कराए गए हैं. इनमें आईपीसी की धारा 409, 120बी, 419 और आर्म्स एक्ट की धारा 21, 25 व 30 के तहत आरोप लगाए गए हैं। पहली एफआईआर 22 जुलाई 2026 को दर्ज की गई थी, जबकि दो अन्य एफआईआर इसके बाद दर्ज हुईं. ये मामले अफजाल अंसारी के नाम स्वीकृत तीन अलग-अलग शस्त्र लाइसेंस की पत्रावलियों से जुड़े हैं. आरोप है कि इन लाइसेंस से संबंधित पत्रावलियां गाजीपुर के डीएम कार्यालय से गायब हुई हैं। सुनवाई के दौरान अफजाल अंसारी के वकील उपेंद्र उपाध्याय ने दलील दी कि जिन पत्रावलियों के गायब होने को लेकर केस दर्ज किए गए हैं, वे वर्ष 1983 से 1987 के बीच की हैं. जबकि एफआईआर वर्ष 2026 में दर्ज की गई हैं. उन्होंने अदालत में कहा कि लाइसेंस की पत्रावली डीएम कार्यालय से गायब हुई है और कार्यालय के कस्टोडियन डीएम होते हैं. ऐसे में पत्रावली गायब होने में उनके मुवक्किल की कोई भूमिका नहीं है।
Purvanchal News जोड़े आपको पूर्वांचल से….