वाराणसी। बीएचयू में आयोजित सीएमई कार्यशाला में सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम में शीघ्र पहचान और विशेषज्ञ कोल्पोस्कोपी की आवश्यकता पर जोर दिया। सर्वाइकल कैंसर भारत में दूसरा सबसे आम कैंसर है और हर वर्ष इसके लगभग एक लाख मामले सामने आते हैं। भारत में हर आठ मिनट में एक महिला की इस बीमारी के कारण मृत्यु हो जाती है। 9 अगस्त को बीएचयू के के.एन. उडुपा सभागार में आयोजित महत्वपूर्ण सीएमई-सह-कार्यशाला “द शार्प आई” में देशभर के प्रख्यात चिकित्सक एकजुट हुए। इस कार्यशाला का आयोजन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, बीएचयू के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग द्वारा एसोसिएशन ऑफ गायनेकोलॉजिक ऑन्कोलॉजिस्ट्स ऑफ इंडिया (एजीओआई) के सहयोग से महिलाओं को सर्वाइकल कैंसर से बचाने के उद्देश्य से किया गया। यह कार्यक्रम सर्वाइकल कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा इसकी रोकथाम, स्क्रीनिंग और उपचार की नवीनतम रणनीतियों के प्रसार के लिए समर्पित था। सीएमई का उद्घाटन मुख्य अतिथि प्रो. एस.एन. सांखवार, निदेशक, आईएमएस, बीएचयू ने किया। इस अवसर पर आयोजन अध्यक्ष प्रो. संगीता राय, विभागाध्यक्ष, प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग, आईएमएस, बीएचयू; यूपी एजीओआई की अध्यक्ष प्रो. निशा सिंह; एजीओआई की सचिव प्रो. अमृता चौरसिया; आयोजन सचिव डॉ. लावण्या अनुरंजनी, सहायक प्रोफेसर, प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग, आईएमएस, बीएचयू तथा सह-आयोजन सचिव डॉ. कीर्ति कैथवास, सहायक प्रोफेसर, प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग, आईएमएस, बीएचयू उपस्थित रहीं। प्रो. एस.एन. सांखवार ने एचपीवी टीकाकरण के साथ-साथ सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम और इसके प्रति जागरूकता के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने जागरूकता फैलाने के लिए विभाग द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। प्रो. संगीता राय ने सर्वाइकल कैंसर की शरीर क्रियाविज्ञान तथा एचपीवी संक्रमण पर अपना व्याख्यान दिया। प्रमुख ऑन्कोलॉजिस्ट प्रो. निशा सिंह, विभागाध्यक्ष, ऑन्कोलॉजी विभाग, केजीएमयू, लखनऊ ने प्रो. अमृता चौरसिया, विभागाध्यक्ष, एमएलएनसी, प्रयागराज के साथ मिलकर कैंसर-पूर्व घावों के उपचार के लिए विभिन्न शल्य प्रक्रियाओं का प्रदर्शन किया। मुंबई की प्रसिद्ध स्त्री-रोग ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. प्रिया गणेश ने सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम और शीघ्र स्क्रीनिंग की विधियों के बारे में जानकारी दी तथा कोल्पोस्कोपी का लाइव प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में देश के विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों से आए विशेषज्ञ संकाय ने भी भाग लिया। इनमें एसजीपीजीआई, लखनऊ के डॉ. अमृत गुप्ता; एसएनएमसी, आगरा की विभागाध्यक्ष डॉ. शिखा सिंह; आईएमएस, बीएचयू की प्रो. अंजलि रानी; आईएमएस, बीएचयू की प्रो. ममता; पटना की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. श्वेता सिंह; पीएमसीएच, पटना की डॉ. पूजा सिंह तथा केजीएमयू, लखनऊ की डॉ. तारिणी शामिल थीं। उन्होंने नवीनतम तकनीकों तथा कैंसर-पूर्व घावों की रोकथाम पर विस्तृत व्याख्यान दिए। विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रतिभागियों ने कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक भाग लिया और सर्वाइकल कैंसर के स्क्रीनिंग एवं उपचार से संबंधित निर्णय लेने के अपने कौशल को और बेहतर किया। सीएमई में वीओजीएस की अध्यक्ष डॉ. अर्चना मिश्रा, वीओजीएस की सचिव डॉ. अनु अग्रवाल तथा प्रसिद्ध स्त्री रोग विशेषज्ञ एवं एचआईएमएस की विभागाध्यक्ष प्रो. मधु जैन सहित वाराणसी के अनेक प्रमुख स्त्री रोग विशेषज्ञों, ऑन्कोलॉजिस्टों और चिकित्सकों की गरिमामयी उपस्थिति रही। आईएमएस, बीएचयू के संकाय सदस्यों, जिनमें प्रो. अंजलि रानी, प्रो. ममता, डॉ. सुचि जैन, डॉ. साक्षी अग्रवाल और डॉ. दीप्ति शामिल थीं, ने वरिष्ठ रेजिडेंट्स, स्नातकोत्तर एवं स्नातक विद्यार्थियों के साथ उत्साहपूर्वक भाग लिया और सीएमई-सह-कार्यशाला के सफल आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कोल्पोस्कोपी पर व्यावहारिक प्रशिक्षण तथा थर्मल एब्लेशन, क्रायोएब्लेशन और एलईईपी जैसी विभिन्न एब्लेटिव तकनीकों का लाइव ऑपरेशन थिएटर प्रसारण सीएमई का मुख्य आकर्षण रहा। सीएमई का समापन एक प्रभावशाली आह्वान के साथ हुआ, जिसमें स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को विभिन्न विशेषज्ञताओं के बीच समन्वय स्थापित करते हुए अधिक से अधिक महिलाओं की स्क्रीनिंग और समय पर उपचार सुनिश्चित करने के लिए प्रेरित किया गया। सभी विशेषज्ञों ने मिलकर डब्ल्यूएचओ के वैश्विक लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में प्रयास करने का संकल्प लिया, जिसके अंतर्गत 90 प्रतिशत महिलाओं का टीकाकरण, 70 प्रतिशत महिलाओं की स्क्रीनिंग और 90 प्रतिशत रोगियों का उपचार सुनिश्चित करना है, ताकि सर्वाइकल कैंसर के कारण होने वाली बीमारी और मृत्यु को कम किया जा सके। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि सर्वाइकल कैंसर एक रोकथाम योग्य कैंसर है।
Purvanchal News जोड़े आपको पूर्वांचल से….