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मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय गोरखपुर की डॉ पूजा सिंह को सीएसटी यूपी से मिला 13.86 लाख रुपये का शोध अनुदान 

लखनऊ। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी), गोरखपुर ने अनुसंधान एवं नवाचार के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। कुलपति प्रो. अनुपमा कौशिक शर्मा के मार्गदर्शन एवं सतत प्रोत्साहन से विश्वविद्यालय की शोध गतिविधियों को निरंतर नई ऊँचाइयाँ प्राप्त हो रही हैं। इसी क्रम में रसायन विज्ञान एवं पर्यावरण विज्ञान विभाग की सहायक आचार्य डॉ. पूजा सिंह को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, उत्तर प्रदेश (सीएसटी, यूपी) द्वारा तीन वर्ष की अवधि के लिए 13.86 लाख रुपये की अनुसंधान परियोजना स्वीकृत की गई है। स्वीकृत परियोजना का विषय “डिज़ाइन एंड डेवलपमेंट ऑफ मल्टीफंक्शनल-कॉन्जुगेटेड कोवेलेंट ऑर्गेनिक फ्रेमवर्क फोटो-इलेक्ट्रोकैटलिस्ट्स फॉर सोलर-ड्रिवेन सीओ₂ फिक्सेशन एंड सस्टेनेबल ऑर्गेनिक सिंथेसिस” है। यह परियोजना सौर ऊर्जा के प्रभावी उपयोग, कार्बन डाइऑक्साइड के उपयोगी रासायनिक उत्पादों में रूपांतरण तथा पर्यावरण-अनुकूल रासायनिक संश्लेषण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने की क्षमता रखती है। परियोजना में डॉ. पूजा सिंह प्रधान अन्वेषक (प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर) के रूप में कार्य करेंगी, जबकि विश्वविद्यालय के प्रो. राजेश कुमार यादव एवं प्रो. डी. के. द्विवेदी सह-प्रधान अन्वेषक (को-प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर) के रूप में अपनी विशेषज्ञता प्रदान करेंगे। अनुसंधान दल का उद्देश्य ऐसे उन्नत फोटो-इलेक्ट्रोकैटलिस्ट विकसित करना है, जो सौर ऊर्जा की सहायता से कार्बन डाइऑक्साइड के स्थायी उपयोग और हरित रसायन (ग्रीन केमिस्ट्री) को बढ़ावा देने में सहायक हों। यह परियोजना जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने, कार्बन उत्सर्जन को कम करने तथा स्वच्छ एवं सतत ऊर्जा आधारित प्रौद्योगिकियों के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इसके माध्यम से विश्वविद्यालय में उच्चस्तरीय अनुसंधान को नई गति मिलने के साथ-साथ शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों को भी अत्याधुनिक अनुसंधान कार्यों से जुड़ने का अवसर प्राप्त होगा। विश्वविद्यालय परिवार ने इस उपलब्धि पर डॉ. पूजा सिंह तथा परियोजना से जुड़े सभी अन्वेषकों को बधाई दी है। साथ ही माननीय कुलपति प्रो. अनुपमा कौशिक शर्मा के प्रति आभार व्यक्त किया है, जिनके नेतृत्व, मार्गदर्शन एवं प्रोत्साहन से विश्वविद्यालय में अनुसंधान, नवाचार और अकादमिक उत्कृष्टता का वातावरण निरंतर सुदृढ़ हो रहा है।

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