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वर्षा के जल को संचय किया जाना अति आवश्‍यक- कुलपति जेपी सैनी

लखनऊ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर एवं भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय केअंतर्गत वर्षा ऋतु के पानी को संरक्षित करने हेतु इस अभियान की शुरूआत 2021 में किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य वर्षा जल को कुएं, तालाब, बावली, रिजर्वॉयर अन्य माध्यम से सुरक्षित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया। इसी कार्यक्रम के अन्तर्गत लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो० जय प्रकाश सैनी की प्रेरणा से लखनऊ विश्वविद्यालय के EIACP एवं इंस्टिट्यूट ऑफ वाइल्ड साइंस के अंतर्गत जल संरक्षण से संबंधित प्रोग्राम कार्यक्रम का प्रारंभ किया गया । कार्यक्रम के अंतर्गत  लखनऊ विश्वविद्यालय के मंथन हाल से जल संरक्षण से संबंधित पोस्टर जारी किया गया।  जिसमें अधिष्ठाता छात्र कल्याण एवं EIACP की को-आर्डिनेटर तथा  इंस्टिट्यूट ऑफ़ वाइल्ड साइंस की डायरेक्टर प्रो० अमिता कनौजिया, कुलसचिव डॉ.भावना मिश्रा के साथ-साथ विनीता जी, मनीषा जी व शिवानी जी आदि उपस्थिति रही। उल्लेखनीय है कि वर्तमान में धरती पर उपलब्ध 71 प्रतिशत जल  में से पीने योग्य जल मात्र 8 प्रतिशत ही है जिसका संरक्षण किया जाना मानव सभ्यता के लिए अत्यंत आवश्यक है जिसके लिए स्थान-स्थान पर कुएं, तालाब, बावल  बना कर वर्षा जल को संचित करने  का प्रयास किया जाना आवश्यक है। कुलपति ने यह भी बताया आज हम  परंपरागत ज्ञान पद्धति को भूलते जा रहे हैं जिसके अंतर्गत गांव, कस्बों व  एवं नगरों में प्राचीन काल में जल का संचय किया जाता था। कुलपति जी का यह भी कहना था कि यह जल संरक्षण जहाँ  एक तरफ धारणीय विकास की अवधारणा को पुष्ट करता है वहीं दूसरी ओर भावी पीढ़ी एवं भविष्य के लिए  पर्याप्त जल की उपलब्धता सुनिश्चित करते हुए जल संकट की समस्या से मानवता को निजात दिलाने में सहायक होगी। कुलपति जी ने यह भी कहा कि इस दिशा में पूर्णत: सफलता तभी प्राप्त होगी जब संपूर्ण जनमानस इसके लिए जागरूक होगी साथ ही साथ प्रत्येक व्यक्ति इस अभियान से जुड़कर सक्रिय प्रयास करेगा।

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