शिवकुमार
गाजीपुर। जिले की सियासत में मौर्यवंशियों का स्वर्णिम इतिहास रहा है। मौर्यवंशी मतदाता किसी भी दल का समीकरण बनाने और बिगाड़ने में सक्षम है। अबतक जनपद में चार मौर्यवंशी रामजी कुशवाहा दिलदारनगर विधानसभा से, जयराम कुशवाहा जमानियां विधानसभा से, रामनारायण कुशवाहा और उमाशंकर कुशवाहा सदर विधानसभा से निर्वाचित हुए हैं। जगदीश कुशवाहा निर्दलीय प्रत्याशी के रुप में गाजीपुर लोकसभा से निर्वाचित हुए थे। बृजभूषण कुशवाहा को भाजपा ने एमएलसी बनाया था। बसपा के बाद भाजपा की तरफ मौर्यवंशियों का सबसे ज्यादा रुझान है। पुरानी पीढ़ी के बाद अब नये युवा नेता कमल के फूल को हाथ में लेकर गतिमान हैं। विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही मौर्यवंशी युवाओं की सक्रियता और बढ़ गयी है। विधानसभा टिकट की दावेदारी के लिए वह बढ़-चढ़ कर अपना दावा पेश कर रहे हैं। सुधाकर कुशवाहा निवासी जलालाबाद दुल्लहपुर जो वर्तमान में भाजपा के जिला उपाध्यक्ष हैं। उन्होने शुरु से ही अपने चाचा पूर्व एमएलसी बृजभूषण कुशवाहा के सानिध्य में और डिप्टी सीएम केशव मौर्या के दिशा-निर्देशन में राजनीति कर रहे हैं। सिंहासन कुशवाहा निवासी चकिया जंगीपुर जो बसपा से भाजपा में आये और अपने दम पर भाजपा में राजनीति और समाजसेवा कर रहे हैं। अपने मधुर और मिलनसार एवं सहयोगी व्यक्तित्व के चलते भाजपा के सभी धड़ों के नेताओं के प्रिय कार्यकर्ता हैं। रामेश्वर कुशवाहा निवासी बेमुआ जमानिया गाजीपुर जो बसपा से भाजपा में आये हैं। इनकी गिनती महामहीम के नजदीकियों में होती है। धर्मेंद्र कुशवाहा निवासी भदौरा छात्र जीवन से राजनीति शुरु कर बसपा से भाजपा में आये। अपनी सक्रियता के चलते भाजपा में इन्होने पहचान बनायी है। बड़े नेताओं का विश्वास जीता है। इन्हे चुनाव में बड़ी जिम्मेदारियां भी मिली हैं। सियासी गलियारों में चर्चा है कि जमानियां में सबसे ज्यादे कुशवाहा हैं। इसके बाद जंगीपुर, सदर मुहम्मदाबाद, जहुराबाद, जखनिया और सैदपुर में है जो किसी भी दल के समीकरण को बना बिगाड़ सकते हैं। इसलिए भाजपा अवश्य ही एक मौर्यवंशी पर दांव लगा सकती है। अब देखते हैं कि इन चारो कार्यकर्ताओं में से किसका भाग्य उदय होता है।
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