गाजीपुर। सतर्कता जागरूकता अभियान-2026 सत्यनिष्ठा से समृद्धि जनपद में जागरूकता एवं साक्षरता शिविर के अंतर्गत लोक अयुक्त एवं उप लोकायुक्त, उत्तर प्रदेश की ओर से भ्रष्टाचार एवं कुप्रशासन के विरुद्ध प्रदेश सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के संबंध में आमजन को जागरूक किया गया। इस अवसर पर अविनाश शर्मा, जनसंपर्क अधिकारी एवं मुख्य प्रोटोकॉल अधिकारी तथा श्वेताक्ष मिश्र, समीक्षा अधिकारी के निर्देशन में कलेक्ट्रेट सभागार में जनसुनवाई आयोजित की गई। इसमें उपस्थित लोगों को लोकायुक्त एवं उप लोकायुक्त की कार्यप्रणाली, अधिकारों तथा शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश को भ्रष्टाचार एवं कुप्रशासन से मुक्त बनाने के उद्देश्य से लोकायुक्त एवं उप लोकायुक्त के समक्ष मंत्रियों, विधायकों एवं अन्य लोकसेवकों के विरुद्ध भ्रष्टाचार, पद के दुरुपयोग तथा कुप्रशासन से संबंधित प्राप्त परिवादों (अभिकथन/शिकायत) पर नियमानुसार जांच एवं निराकरण की कार्रवाई की जाती है। जांच के उपरांत उत्तरदायी मंत्रियों, विधायकों एवं लोकसेवकों के विरुद्ध कार्रवाई हेतु संस्तुतियां सक्षम प्राधिकारी (मुख्यमंत्री/मुख्य सचिव) को प्रेषित की जाती हैं। साथ ही वार्षिक प्रतिवेदन माननीय राज्यपाल को प्रस्तुत किया जाता है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश शासन के विभिन्न विभागों, सरकारी कंपनियों, सहायक सरकारी कंपनियों, निगमों, सोसाइटियों एवं अधिसूचित परिषदों से संबंधित शिकायतें लोकायुक्त के समक्ष प्रस्तुत की जा सकती हैं। इसके अतिरिक्त सेवानिवृत्ति देयकों के भुगतान, मृतक आश्रित सेवायोजन, विकास प्राधिकरण एवं आवास विकास परिषद, निराश्रित एवं वृद्ध महिलाओं की पेंशन तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के आरक्षण (सेवा) से संबंधित मामले भी निर्धारित प्रक्रिया के अंतर्गत प्रस्तुत किए जा सकते हैं। लोकायुक्त के अधिकार क्षेत्र के संबंध में जानकारी देते हुए बताया गया कि उत्तर प्रदेश राज्य के समस्त अधिकारी एवं कर्मचारी, मंत्री (मुख्यमंत्री को छोड़कर), विधायक, विधान परिषद सदस्य, नगर निगम के महापौर, नगर पालिका परिषद एवं नगर पंचायतों के अध्यक्ष तथा जिला पंचायत अध्यक्ष के विरुद्ध निर्धारित प्रावधानों के अनुसार परिवाद प्रस्तुत किया जा सकता है। धारा-22 में वर्णित न्यायाधीश, न्यायिक अधिकारी एवं महालेखाकार आदि इसके अपवाद हैं। अधिकारियों ने शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया के बारे में बताया कि लोकायुक्त एवं उप लोकायुक्त के समक्ष परिवाद निर्धारित प्रपत्र पर तीन प्रतियों में, यथासंभव राजभाषा हिंदी में टंकित कराकर प्रस्तुत करना होगा। इसके साथ धारा-9(2) के अनुसार नोटरी शपथ पत्र तथा धारा-9(3) के अनुसार परिवाद, शपथ पत्र एवं संलग्नकों का निर्धारित प्रक्रिया के तहत सत्यापन आवश्यक है। अभिकथन संबंधी परिवाद प्रस्तुत करने के लिए 2,000 रुपये की प्रतिभूति निर्धारित लेखा शीर्षक के अंतर्गत भारतीय स्टेट बैंक अथवा कोषागार में चालान के माध्यम से जमा करनी होगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई परिवाद मिथ्या अथवा फर्जी पाया जाता है तो संबंधित परिवादी पर माननीय लोकायुक्त द्वारा 50,000 रुपये तक का हर्जाना लगाया जा सकता है तथा जमा प्रतिभूति की धनराशि जब्त की जा सकती है। प्रतिभूति की धनराशि वापस प्राप्त करने के संबंध में बताया गया कि राज्य सरकार द्वारा ई-पेमेंट के माध्यम से भुगतान किए जाने के कारण परिवादी को अपना राष्ट्रीयकृत बैंक का बचत खाता संख्या, बैंक एवं शाखा का नाम, जिला तथा आईएफएससी कोड सहित पासबुक की स्वप्रमाणित छायाप्रति मूल चालान के साथ उपलब्ध करानी होगी। इसके अतिरिक्त परिवाद में अपना पूरा नाम, पता, मोबाइल नंबर एवं ई-मेल आईडी अंकित करना भी आवश्यक है। अंत में अधिकारियों ने आमजन से अपील की कि वे भ्रष्टाचार, पद के दुरुपयोग एवं कुप्रशासन के विरुद्ध जागरूक रहें तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता होने पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत लोकायुक्त एवं उप लोकायुक्त के समक्ष अपनी शिकायत प्रस्तुत करें। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार मुक्त एवं पारदर्शी प्रशासन की स्थापना में जनसहभागिता अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी वि0/रा0, जिला विकास अधिकारी के साथ समस्त सम्बन्धित अधिकारी उपस्थित रहे।
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